शहर में करीब 15 हजार स्ट्रीट लाइटें महीनों से खराब पड़ी है। इसके कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विभिन्न वार्डों के पार्षदों ने भी इसकी कई बार शिकायत की, लेकिन कोई हल नहीं निकला।
शाम ढलते ही स्मार्ट सिटी की अंधेरे में डूब जाने वाली सड़कों का मुद्दा आखिकार शुक्रवार को नगर निगम सदन में भी गूंजा। अमर उजाला द्वारा खराब पड़ीं स्ट्रीट लाइटों का मुद्दा प्रमुखता से उठाए जाने के बाद महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी ने पार्षदों की विशेष बैठक बुलाई।
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इस समस्या को लेकर पार्षदों ने जमकर हंगामा किया। ऐेसे में सदन की ओर से एक माह के अंदर कार्यदायी संस्था द्वारा सभी खराब स्ट्रीट लाइटों को ठीक कराने का फैसला लिया गया है। ऐसा न होने पर कार्यदायी संस्था का आगे दो सालों के लिए होने वाले अनुबंध को नहीं बढ़ाया जाएगा।
शहर में करीब 15 हजार स्ट्रीट लाइटें महीनों से खराब पड़ी है। इसके कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विभिन्न वार्डों के पार्षदों ने भी इसकी कई बार शिकायत की, लेकिन कोई हल नहीं निकला।
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सदन की इस बैठक में सिर्फ इसी मुद्दे पर चर्चा हुई। महीनाें से खराब पड़ीं स्ट्रीट लाइटें ठीक नहीं कराने व इसकी शिकातय पर कार्यदायी संस्था के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारागलत व्यवहार करने को लेकर पार्षदों ने हंगामा किया।
महापौर ने भी पार्षदों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कार्यदायी संस्था को चेतावनी दी। पार्षद मुकुंद तिवारी ने पहले दधिकांदो मेला वाले क्षेत्रों की स्ट्रीट लाइटें बदलने का प्रस्ताव रखा। जिस पर सहमति बनी।