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मुट्ठीगंज हादसा : मेरी आंखों के सामने ही मम्मी-पापा जलते रहे, मैं बचा नहीं पाई

Wed, 20 Mar 2024 12:53 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मुट्ठीगंज में आग में जलकर तीन लोगों की मौत के मामले में मुहल्ले में सन्नाटा पसरा हुआ है। बेटी को मलाल है कि वह अपने सामने माता-पिता को जलते हुए देखती रही और उनको बचा नहीं सकी। देखते ही देखते दो परिवार खत्म हो गए। 
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हादसे में माता-पिता को खोने वाली शिवानी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आंखों के सामने मम्मी -पापा के जिंदा जलने की कहानी बयां करते हुए शिवानी कांप उठती है। उसकी आंखों के सामने वह मंजर तैरने लगता है,जब वह आग की लपटों से घिरी अपनी मम्मी को बचाने की जद्दोजहद करती रही। वह बताती है कि भाभी के मायके वालों ने परिजनों को लकड़ी के पटरे से पीटा और फिर पेट्रोल छिड़ककर घर में आग लगा दी थी।

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शिवानी उस घटना की चश्मदीद है, जिसकी आंखों से सामने यह सब हुआ। मंगलवार की सुबह पूरा सत्तीचौरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो गया था। वहां पहुंचने पर व्यवसायी के घर के चारों तरफ रोड पर पुलिस बैरिकेडिंग कर दी गई थी।

सिर्फ परिवार और मीडिया के अलावा अन्य किसी को जाने नहीं दिया जा रहा था। वहां पहुंचने पर देखा गया कि उनकी चारों बेटी एक दूसरे से लिपटकर रो रही थीं और कुछ महिलाएं उन्हें संभालने में लगी हुई थीं। घटना के बारे में पूछने पर शिवानी बताती हैं कि भैया अंशू चाचा राजू को लेकर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने गए। और उसी समय भाभी के मायके में भी फोन करके घटना की जानकारी दे दी गई।

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हादसे में माता-पिता को खोने वाली शिवानी। - फोटो : अमर उजाला
घटना से पहले घर में हुई मारपीट

भैया थाने से रिपोर्ट दर्ज कराकर लौट नहीं पाए थे कि भाभी के मायके से करीब 50 लोग घर पर पहुंच आए और मोटी-मोटी लकड़ी से उन लोगों पर हमला बोल दिया। इस हमले में मम्मी का सिर फट गया। वह खून से लथपथ हो गईं। वह लोग पापा-मम्मी दोनों को पीटने लगे। तब तक थाने से पुलिस आ गई और ऊपर कमरे का दरवाजा तोड़कर शव को फंदे से उतार कर नीचे गया गया। इसके बाद भाभी के मायके वालों ने घर के अंदर तोड़फोड़ करते हुए सबसे पहले ऊपर वाले कमरे में आग लगा दी।









इस दौरान मैं, मां, चाची और पिता घर के अंदर फंसे ही रह गए। भाभी के मायके वाले बाहर निकले और बाइक से पेट्रोल निकाल कर घर में आग लगा दी। फिर, बाहर से शटर गिराकर बंद कर दिए। वह लोग जोर-जोर से जान बचाने के लिए चिल्लाने लगे। नीचे आग की इतनी तेज लपटें थीं कि वह लोग जान बचाने के लिए ऊपर भागने लगे। मेरे साथ पापा और चाची तो ऊपर चढ़ गए, लेकिन जब चार सीढ़ी बची रह गई तो मां वहीं बैठ गई।

मुट्ठीगंज में आत्महत्या करने वाली अंशिका अपने पति के साथ। - फोटो : अमर उजाला
पापा को देखकर चीखती रही शिवानी

आग की लपट इतनी तेज थी कि उन्हें बर्दास्त नहीं हो रहा था। वह जलने की वजह से चीख रही थीं। उस समय बगल में चाची घर का शीशा तोड़कर मम्मी को वहां से बाहर निकलने के लिए गईं, लेकिन मम्मी नहीं उठ पाईं। उस दौरान उनकी चाची भी जल गईं। उसके बाद वह और उनकी चाची बगल के छत पर कूद गईं। पापा को बुलाने लगीं, लेकिन पापा भी नहीं आ पाए। बोले बेटा मैं नहीं फांद पाऊंगा। इस दौरान पापा भी मम्मी को बचाने की कोशिश में जुट गए।

घर में अंधेरा होने की वजह से दोनों मुझे दिखाई नहीं दे रहे थे। मम्मी के चिल्लाने की आवाज आ रही थी। मैं बोली मम्मी मैं तुम्हें लेने आ रही हूं। उसके बाद मैं वहां गई, लेकिन मेरे मम्मी-पापा वहां नहीं दिखे। दोनों ही मेरे आंखों के सामने जलते रहे और मैं उन्हें बचा नहीं पाई। यह कहते शिवानी अपने बड़ी बहन से लिपटकर जोर जोर से रोने लगी।

मुट्ठीगंज में आगजनी से दंपती की मौत हो गई। - फोटो : अमर उजाला
सुबह सबके साथ मिलकर भाभी ने होली के लिए बनाया था पापड़

राजेंद्र का चार मंजिला मकान था। चौथे मंजिल पर उनके बेटे व बहू रहते थे। अग्निकांड में घायल व्यवसायी की छोटी बेटी शिवानी रोते हुए अपना दर्द बयां किया। उसने बताया कि उसकी भाभी अंशिका हर रोज करीब तीन बजे चौथे मंजिल पर अपने कमरे में चली जाती थीं और वहां से रात आठ बजे नीचे उतरती थीं। सोमवार को होली के लिए चिप्स, पापड़ बनाना था, इसलिए सब सुबह जल्दी उठे थे। एक साथ मिलकर चिप्स -पापड़ बनाए। उसके बाद खाना बनाया गया।

उसकी भाभी अस्पताल से रिपोर्ट लेकर आईं और फिर खाना खाकर करीब तीन बजे अपने कमरे में चली गईं। वह 2:30 बजे कोचिंग चली गईं, फिर पांच बजे लौटीं। उसके बाद रात करीब 9:30 बजे तक जब भाभी छत से नीचे नहीं उतरी तो वह मम्मी से उनके बारे पूछने लगी। मां ने बताया सुबह जल्दी उठी हैं, हो सकता है सो रही हों। करीब 9:45 बजे उसके भैया पालतू कुत्ते जैकी के लिए बाहर से खाना लेकर आए।

उसे खाना खिलाने के बाद बोले, मम्मी खाना गरम करो मैं ऊपर से अंशिका को बुलाकर आ रहा हूं। जब भाई ऊपर जाकर दरवाजा खटखटाया कोई जवाब नहीं आया। भाभी के पास फोन किया फिर भी जवाब नहीं आया। उसके बाद वह खिड़की का शीशा तोड़कर अंदर देखा तो उनकी पत्नी फंदे पर लटकी हुई थीं। उसके बाद भाई तुरंत ऊपर से चिल्लाते हुए नीचे उतरा। शोर मचाने लगा। मम्मी उसने फांसी क्यों लगा ली। मम्मी ने कहा हम लोगों को तो कुछ नहीं पता, हम तो नीचे ही हैं उसने ऐसा कब कर लिया।
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घटना के दूसरे दिन घर पर जुटी भीड़। - फोटो : अमर उजाला
पुलिस वालों ने अंदर किसी को आने देते तो शायद मेरे मम्मी पापा बच गए होते

शिवानी ने बताया कि वह अपने चाचा की छत से बाहर खड़े लोगों को बचाने के लिए चिल्लाती रही लेकिन पुलिस वालों ने किसी को घर के अंदर नहीं आने दिया। यदि अंदर कोई आ गया होता तो मेरे मम्मी-पापा की जान बच गई होती। शिवानी बार-बार यह कहकर रो रही थी कि हमें अपने मम्मी पापा चाहिए हमें इंसाफ चाहिए।
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