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Moharram 2020: ताजिए दफनाने पर रोक से नाराजगी, बत्ती बुझाकर जताया विरोध

Mon, 31 Aug 2020 09:53 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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ताजिए दफनाने पर रोक को लेकर नाराजगी जताते मुस्लिम समुदाय के लोग। - फोटो : अमर उजाला
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प्रयागराज। माहे मोहर्रम की दसवीं पर रविवार को ताजिया, अलम, ताबूत, जुलजनाह, तुरबत, झूला व मेंहदी के फूलों को दफन करने की पुरानी परंपरा की इजाजत न दिए जाने से मुसलिमों में नाराजगी छाई रही। ताजिए और फूलों को दफन नहीं करने देने से अफसोस जताया गया। इसके विरोध में मुसलमानों ने घरों की बत्ती बुझाकर विरोध जताया।
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ताजिएदारों लोगों का कहना था कि कोरोनाकाल में मध्य प्रदेश में सरकार गठन और शपथ ग्रहण का भव्य समारोह आयोजित करने के साथ ही राम मंदिर के शिलान्यास में भी खुलेआम कोविड -19 की गाइड लाइन की धज्जियां भी उड़ाई गईं। लेकिन, गणेशोत्सव और मोहर्रम पर रोक लगा कर सरकार ने दोनों समुदायों की आस्था पर कुठाराघात किया है। इससे नाराज लोगों ने सड़कों, गलियों व घरों की बत्ती बुझा कर विरोध दर्ज कराया।

वहीं, रानीमंडी नवाब नन्हे की कोठी पर शामें गरीबां की मजलिस भी अजाखाने में अंधेरा कर हुई। दरियाबाद में इमामबाड़ा अरब अली खां व इमामबाड़ा सलवात अली खां में शामे गरीबां की मजलिस में खानदाने रसूल की शहादत के बाद की मंजरकशी करते हुए मजलिस- ए -शामे गरीबा हुई। मौलाना आमिर रिजवी के अजाखाने पर मौलाना रजी हैदर ने मजलिस को खिताब किया। इमामबाड़ा नजीर हुसैन, बख्शी बाजार में मोमबत्ती जला कर हांथों में खाली कूजे लेकर छोटे -छोटे बच्चे हाय सकीना हाय... प्यास अल अतश... अल अतश... की सदा बुलंद करते रहे।
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