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चेहल्लुम पर इमामबाड़ों में सजे अलम, ताबूत और ताजिए, मजलिसों में मातम

Mon, 12 Oct 2020 01:20 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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चेहल्लुम पर सजाए गए ताजिए। - फोटो : अमर उजाला
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इमाम हुसैन के चालीसवें पर बृहस्पतिवार को चेहल्लुम पर शहर के इमामबाड़ों में अलम,ताबूत सजाए गए। कोविड-19 के संक्रमण की वजह से इस अवसर पर कहीं से जुलूस नहीं निकाला जा सका। अअलबत्ता अजाखानों व इमामबारगाहों के अंदर ही गमजदा माहौल में चेहल्लुम की मजलिस हुई और मातमी अंजुमनों ने नौहा और मातम के साथ कर्बला के बहत्तर शहीदों को नम आंखों से खिराजे अकीदत पेश की।
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रानीमंडी स्थित इमामबाड़ा आजम हुसैन से कदीमी चेहल्लुम जुलूस नहीं निकाला जा सका। मौलाना जव्वाद हैदर की कयादत में ठीक 12 बजे नमाज अदा की गई। इमामबाड़े के अंदर मौलाना जव्वाद हैदर रिजवी ने मजलिस को खिताब करते हुए कर्बला के बहत्तर शहीदों का मार्मिक अंदाज में जिक्र किया। मजलिस के बाद शबीहे ताबूत इमाम हुसैन व जुलजनाह की शबीह निकाली गई। नौहा और मातम का सिलसिला शुरू हुआ तो एक के बाद एक मातमी दस्तों ने पुरदर्द नौहाख्वानी से माहौल को गमजदा बना दिया।

सबसे पहले अंजुमन अब्बासिया के नौहाख्वान डॉ अबरार, फैज जाफरी, सैयद हुसैन मेंहदी, सादिक, अरशद जाफरी ने गमगीन नौहा पढ़ा। इसके बाद अंजुमन शब्बीरिया के नौहाख्वान मोहम्मद फैज, शफक, गदीर हैदर, तारिक अब्बास, शाजू ने कर्बला के शहीदों को याद करते हुए नौहा और मातम का नजराना पेश किया। उधर, दरियाबाद की अंजुमन हुसैनिया कदीम के शाह बहादुर व हुसैन बहादुर की कयादत में नौहाख्वानी करते हुए हुसैन -ए मजलूम को पुरसा पेश किया गया। इमामबाड़ा आजम हुसैन के गेट के बाहर सैनिटाइजर, हैंडवाश के साथ लोगों मास्क भी दिया जा रहा था।
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इमामबाड़ा परिसर में ताबूत इमाम हुसैन, गाजी अब्बास का अलम, जुलजनाह, हजरत अली अजगर का झूला, आबिदे बीमार का बिस्तर, ताजिया समेत सभी तबर्रुकात की जियारत लोगों ने की। वहीं इमामबाड़ा हाशिम रजा आब्दी में में अंजुमन आबिदिया की ओर से मजलिसे चेहल्लुम आयोजित की गई। इसमे अंजुमन आबिदिया के नौहाख्वान मिर्जा काजिम अली, वेजारत ने नौहा और मातम कर जनाबे सैय्यदाह को उनके लाल हुसैन का पुरसा पेश किया। रानीमंडी बच्चा जी धर्मशाला के सामने इमामबाड़ा मीर हुसैनी में अंजुमन हैदरिया की जानिब से मजलिस हुई। इस मजलिस में हसन रिजवी व साथियों ने गमगीन नौहा और मातम का नजराना पेश किया। अंजुमन के सदस्यों ने तेज धार की छूरियों से लैस जंजीरों से पुश्तजनी कर अपने आप को लहुलुहान कर लिया। देर रात सभी तबर्रुकात पर चढ़ाए गए। फूलों और ताजियों को कर्बला ले जा कर नम आंखों से दफन किया गया।

इस मौके पर मौलाना हसन रजा जैदी, मौलाना रजी हैदर, जाकिरे अहलेबैत रजा अब्बास जैदी, मंजर कर्रार, नजीब इलाहाबादी, गौहर काजमी, सैयद मोहम्मद अस्करी, शाहिद अब्बास रिजवी, जामिन हसन, अब्बास जैदी,मसूद आब्दी,रिजवान जव्वादी, आगा मोहम्मद कैसर, माहे आलम, शजीह अब्बास, अमन अब्बास समेत तमाम लोग मौजूद रहे।

दरियाबाद के इमामबाड़ा सलवात अली खां से नहीं निकला चेहल्लुम का जुलूस
प्रयागराज।
चेहल्लुम पर दरियाबाद स्थित इमामबाड़ा सलवात अली खां से उठने वाला सैकड़ों साल पुराना जुलूस इस बार नहीं निकाला गया। ताहिर मलिक की कयादत में इमामबाड़े के अंदर ही सभी रवायती कार्यक्रम हुए। अंजुमन हाशिमिया के सफदर अब्बास व अंजुमन नकविया के शबी हसन शारू के नेतृत्व में नौहाख्वानों ने नौहा पढ़ा। ताबूत जुलजनाह, अलम, अमारी, ताजिया पर लोगों ने फूल माला चढ़ा कर जियारत की।

 

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