जाने माने फिल्म इतिहासकार पवन झा ने कहा कि आज संगीत क्रियेट नहीं सिर्फ प्रोड्यूस किया जा रहा है। नए गीतकार प्रयास कर रहे हैं लेकिन वह नाकाफी है। आज फिल्में तो खूब बन रही हैं लेकिन उस हिसाब से अच्छे गीत और संगीत नहीं निकल रहे हैं।
पुराने गीतों में आज भी मैलोडी है। यही कारण है कि लता मंगेशकर, आशा भोसले, किशोर कुमार, रफी, मन्ना-डे आदि लोगों ने इतना ऊंचा मुकाम हासिल किया कि आज के गीतकार और संगीतकार वहां तक सोच ही नहीं पा रहे हैं, पहुंचने की तो बात दूर है।
मुंबई से आईं जाने माने संगीतकार मदन मोहन की बेटी संगीता ने कहा कि इलाहाबाद म्यूजिक क्लब का कार्यक्रम काफी सराहनीय है। जिन लोगों ने भारतीय सिनेमा को नई पहचान दी, उनकी याद में होने वाला कार्यक्रम नई पीढ़ी के लिए भी प्रेरक है।
संगीतकार अनिल विश्वास की पुत्री शिखा बोहरा ने कहा कि आज पांव थिरकने वाले संगीत बन रहे हैं, दिल धड़कने वाले संगीत का अभाव है। आज के संगीत में इमोशन खत्म हो गया है। इमोशन के लिए आज भी लोग पुराने गीत सुनते हैं। संगीत के क्षेत्र में जो काम पहले हो गए वह आज भी मील का पत्थर है।
गीतकार राजिंद्र कृष्ण के पुत्र राजेश दुग्गल ने कहा कि आज अच्छे गीतों का अभाव है। पहले गीतकारों और संगीतकारों में समन्वय होता था। पहले गानों को मंगाकर संगीत तैयार किया जाता था। विदित हो कि राजिंद्र कृष्ण ने 269 फिल्मों के लिए 1600 से अधिक गीत लिखे हैं।