मुग्ध करता रहा मोहन वीणा, वॉयलिन का सांगीतिक संगम
गिटार वादक नलिन मजूमदार के जन्म शताब्दी वर्ष पर तीन दिनी सांगीतिक आयोजन पूरा
प्रयागराज। गिटार को भारतीय शास्त्रीय संगीत से परिचित कराने वाले जानेमाने गिटार वादक नलिन मजूमदार के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिनी सांगीतिक आयोजन शुक्रवार को पूरा हुआ। समापन पर मोहन वीणा और वायलिन वादन का संगम सम्मोहित करता रहा।
पंडित विश्व मोहन भट्ट का मोहन वीणा वादन समारोह का आकर्षण रहा। उन्होंने राग विहाग में आलाप, जोड़, झाला से समा बांधने के बाद तीन ताल में गत सुनाई। फिर राग माझ खमाज में छोटे से आलाप के बाद दीपचंदी में गत और फिर राजस्थानी मांड ‘केसरिया बालम पधारो म्हारो देस सुनाकर आनंद किया। उन्होंने वंदे मातरम से समापन किया। इससे पहले जयश्री मजूमदार रॉय ने वॉयलिन पर राग पूरिया धनाश्री में छोटे से आलाप के बाद एक ताल में विलंबित और द्रुत तीन ताल में गत बजाकर मुग्ध किया। फिर उन्होंने राग सागर और धुन बजाकर समापन किया। भट्ट के साथ अभिषेक मिश्र और जयाश्री के साथ विनोद मिश्र ने तबला पर संगत किया।
जगत तारन गोल्डेन जुबली स्कूल स्थित रविंद्रालय में हुई संगीत संध्या का संचालन डॉ.शांति चौधरी ने किया। आरंभ में नलिन दा की जीवनी पर बनी 25 मिनट की डाक्यूमेंटरी फिर दिखाई गई। सर्दी बेमानी ही रही, बड़ी संख्या में संगीतप्रेमी जुटे। संयोजक अंजन मजूमदार ने घोषणा की कि यह सांगीतिक संध्या प्रतिवर्ष और भी बड़े स्तर पर आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम में नलिन दा के वरिष्ठ शिष्य कल्याण घोष, स्वपन चौधरी, गौरव मजूमदार, तुहिना श्रीवास्तव, श्रेया मुखर्जी, त्रिपर्णा राय, सुदीप मुखर्जी, डा.मधु शुक्ला, शंकर चटर्जी आदि मौजूद थे।