कालिंजर नरसंहार में वांछित 65 हजार का इनामी गिरफ्तार
दो राज्यों की पुलिस के लिए सात वर्षों से बना हुआ था सिरदर्द
एसटीएफ ने नैनी में मुठभेड़ के दौरान पकड़ा, भेजा गया जेल
प्रयागराज। बांदा के कालिंजर में 16 साल पहले हुए नरसंहार के मामले में वांछित 65 हजार के इनामी अनुराग मिश्र को एसटीएफ ने मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया। उप्र के साथ ही मप्र के लिए सात वर्षों से सिरदर्द बनेे इस शातिर अपराधी को नैनी में दबोचा गया। जिसके बाद मुकदमा दर्ज कर उसे जेेल भेज दिया गया।
एसटीएफ स्थानीय इकाई के एएसपी नीरज कुमार पांडेय ने बताया कि 2003 में बांदा के कालिंजर गांव में एक साथ आठ लोेगों को डकैत गिरोह ने गोलियों से भून दिया था। यह सभी बरात में शामिल थे जो दर्शन कर लौट रहे थे। घटना में कई लोग जख्मी भी हुए थे। विवेचना के दौरान मामले में नाम प्रकाश में आने के बाद डकैत गैंग के पप्पू यादव, अनुराग मिश्रा उर्फ राजू उर्फ अभय सिंह, विजय व छोटा यादव, राम सुजान आदि को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। कोर्ट ने इस मामले में अनुराग समेत चार लोगों को 2012 में उम्रकैद की सजा सुनाई। जिसके बाद पेशी से लौटते वक्त अनुराग मानिकपुर रेलवे स्टेशन पर पुलिस हिरासत से भाग निकला। गिरफ्तारी न होने पर 2016 में डीजीपी की ओर से 50 हजार (उस वक्त इनाम की अधिकतम सीमा) का इनाम घोषित किया गया। इसके अलावा मप्र पुलिस की ओर से भी उसकी गिरफ्तारी पर 15 हजार का इनाम रखा गया था। बाद में मामला एसटीएफ को सौंपा गया, जिसके बाद सोमवार को आरोपी नैनी में मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया गया। उसके कब्जे से एक पिस्टल, मोबाइल व नगदी मिली।
उप्र व मप्र में दर्ज हैं कुल 17 केस
एएसपी ने बताया कि मूल रूप से बांदा के कालिंजर स्थित तरहटी गांव के रहने वाले इस अपराधी पर सतना, बांदा, चित्रकूट, मानिकपुर में कुल 17 मुकदमे दर्ज हैं। आरोपी सात बहनों में अकेला था, ऐसे में दुलार के चलते बचपन से ही वह गलत सोहबत में पड़ गया। कुख्यात डाकू पप्पू यादव उसके गांव का ही था, ऐसे में उससे भी उसकी दोस्ती हो गई। बड़ा होने पर वह उसी गैंग में शामिल हो गया। फरार होने के बाद वह नाम बदलकर प्रदेश के महोबा, उत्तराखंड के चंपावत में रहा। यही नहीं पूर्व प्रेमिका से शादी भी कर ली, जिससे उसकी दो बेटियां भी हैं।