माघ मेला प्रशासन की ओर से संगमनोज पर शनिवार से शुरू ‘संस्कृति संगम’ के तहत भक्ति रसधार बही। भजन से शुरुआत के बाद सुपरिचित गायक मनोज गुप्ता ने ‘चलो जी चलो आज संगम नहाने,’ सुनाकर समां बांधा। फिर उन्होंने‘जो भी तुम्हारे द्वार आया, उसका ही हुआ कल्याण,’ ‘विनती सुन लो हनुमान,’ ‘अच्युतं केशवम, कृष्ण दामोदरम, रामनारायणम जानकी वल्लभम,’ ‘करते हो तुम कन्हैया मेरा नाम हो रहा है, मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है,’ ‘गंगा तेरा पानी अमृत,’ ‘सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाए तरुवर की छाया’ जैसी गीत-भजन सुनाकर भावविभोर किया।
वहीं वाराणसी से आए पंडित सुखदेव मिश्र ने वायलिन और विभास महराज ने तबले की जुगलबंदी के तहत तीन ताल, दादरा आदि पर आधारित राग सुनाकर सम्मोहित किया। डीएम संजय कुमार ने कहा, संस्कृति संगम का उद्देश्य देश-दुनिया से जुटे लोगों के बीच संस्कृति और अपनी पहचान को प्रस्तुत करना है। संचालन डॉ.रंजना त्रिपाठी ने किया। न्यायमूर्ति रणविजय सिंह और न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता ने अंगवस्त्र देकर कलाकारों को सम्मानित किया।
राष्ट्रीय खादी एवं ग्रामोद्योग प्रदर्शनी-2017 में शनिवार को सांस्कृतिक संध्या के तहत कवयित्री सम्मेलन काव्य कुमुदिनी में मिस्वाह इलाहाबादी, प्रीता बाजपेयी, अदिति मिश्रा, रागिनी चतुर्वेदी, गीता सिंह, ताजवर सुल्ताना, संजू शब्दिता, सुनयना त्रिपाठी आदि ने समसामयिक विषयों पर कविता पाठ करके समय और समाज का सच उकेरा। उपमुख्य कार्यपालक अधिकारी बीएस यादव ने संचालन और अरविंद कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
वहीं प्रदर्शनी के तहत प्रदेश की खादी एवं ग्रामोद्योग इकाइयों के अतिरिक्त राजस्थान, गुजरात, जम्मू कश्मीर, बिहार, झारखंड, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल के खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों के स्टाल पर भी लोगों का जुटना जारी है। लोगों के बीच टसर सिल्क, मटका, तोसा, गरद, मूंगा सिल्क कटिया, बांस, बेत के सजावटी सामान, हस्तशिल्प, सूती ऊनी एवं पशमीना शाल, थुल्मा, चुटका, नंदा चंदेरी साड़ियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। परिक्षेत्रीय ग्रामोद्योग अधिकारी अभय कुमार त्रिपाठी के अनुसार प्रदर्शनी 10 फरवरी तक चलेगी।