कमलेश पाठक के खिलाफ दर्ज हैं 37 मुकदमें
कमलेश पाठक ने औरैया के आर्य नगर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर की जमीन के लिए अधिवक्ता मंजुल चौबे और उसकी बहन सुधा चौबे की हत्या कर दी थी, जिसकी वजह से समाज में उसका भय व दहशत और अधिक बढ़ गई थी। उनका पहला जमानत प्रार्थना पत्र हाईकोर्ट ने खारिज किया था, जिसके खिलाफ विशेष अपील भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। शीर्ष अदालत के निर्देश पर ही उसने दोबारा हाईकोर्ट में जमानत प्रार्थना पत्र दिया था।
कमलेश के वकीलों का कहना था कि वह 14 जुलाई 2020 से जेल में है। पूर्व एमएलसी है। उनके मुकदमे का ट्रायल अभी तक पूरा नहीं हुआ। 16 में से सिर्फ 6 गवाहों के बयान हुए हैं। याची सभी मामलों में जमानत पर है। उसके खिलाफ कुल 37 मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें से वह आठ में बरी हो चुका है। 13 मुकदमों में फाइनल रिपोर्ट लग चुकी है। सात मुकदमे राज्य सरकार वापस ले चुकी है। दो केस में कोई नोटिस या सम्मन नहीं मिला। दो मुकदमे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के हैं, जबकि चार में ट्रायल चल रहा है।
वहीं, मंजुल चौबे के परिवार की ओर से मौजूद अधिवक्ता और सरकारी वकील का कहना था कि याची के प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है कि 13 मुकदमों में उसने फाइनल रिपोर्ट लगवा ली है। इनमें हत्या, फिरौती, हत्या का प्रयास जैसे गंभीर मुकदमे भी शामिल हैं। यदि उसे जमानत पर रिहा किया गया तो वह गवाहों और साक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है। कोर्ट ने जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया।