पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय पहल का आह्वान
प्रथम सत्र में पर्यावरण संरक्षण में धार्मिक नेताओं की भूमिका पर स्वामी मुकुंदानन्द ने धर्म और पर्यावरण के बीच के संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने धार्मिक संस्थाओं से पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय पहल करने का आह्वान किया। शालिनी मेहरोत्रा, स्मृति गौर सिंह और डॉ. अरविंद कुमार ने भी अपने विचार साझा किए। दूसरे सत्र में जलपुरुष डॉ. राजेंद्र सिंह ने पवित्र नदियों के संरक्षण पर जोर दिया और जल सुरक्षा के महत्व पर चर्चा की।
पवित्र नदियों के संरक्षण को धार्मिक और सांस्कृतिक कर्तव्य बताया और इसे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मददगार बताया। तीसरे सत्र में सतत धार्मिक केंद्र और धार्मिक आयोजन पर प्रो. चंद्रमौली उपाध्याय और आचार्य हरि दास गुप्ता ने धार्मिक केंद्रों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ाने की आवश्यकता पर चर्चा की। इस सत्र में डॉ. मनीषा वी. रामेश और सत्यब्रत साहू ने धार्मिक संस्थाओं में सतत व सुरक्षित प्रथाओं के महत्व पर अपने विचार साझा किए।
जलवायु परिवर्तन के खिलाफ विश्वास आधारित कार्यों पर चर्चा
चौथे सत्र में सरकारों की भूमिका में विश्वास आधारित जलवायु क्रियाएं पर अधिकारियों और धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ विश्वास-आधारित कार्यों पर चर्चा की और इस पर विचार किया कि कैसे सरकारें धार्मिक संगठनों के साथ मिलकर प्रभावी कदम उठा सकती हैं। पांचवें सत्र में मिशन लाइफ-सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने में स्वामी आत्मश्रद्धानंद और आर. आर. रश्मि ने व्यक्तिगत स्तर पर सतत जीवनशैली अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
छठवें सत्र में जलवायु अनुकूलन, शमन और आपदा राहत में धार्मिक संगठनों की भूमिका पर चर्चा हुई। स्वागत प्रधान सचिव अनिल कुमार ने किया। समापन सत्र में मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया और संकल्प पत्र जारी किया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार के दृढ़ संकल्प को दोहराया और सभी को सतत विकास के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया।