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हाईकोर्ट : आत्महत्या के लिए उकसाने का केस चलाने के लिए दुष्प्रेरित करने वाले तत्व आवश्यक

Sat, 13 Mar 2021 12:47 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

सिर्फ दहेज के लिए दबाव डालना आत्महत्या के लिए प्रेरित करना नहीं माना जा सकता
आत्महत्या के लिए प्रेरित करने की धारा में दर्ज चार्जशीट रद्द, दहेज उत्पीड़न का मुकदमा चलाने का आदेश
 
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allahabad high court - फोटो : social media
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ आत्महत्या के लिए प्रेरित करने की धारा (306) आईपीसी के तहत मुकदमा चलाने के लिए यह देखा जाना आवश्यक है कि आरोपी द्वारा किए गए कार्यों में आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने वाले तत्व हैं या नहीं जैसा की आईपीसी की धारा 107 में वर्णित है। कोर्ट ने कहा कि दहेज मांगने के लिए दबाव डालने से आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने का अपराध नहीं बनता है। कोर्ट ने धारा 306 आईपीसी के तहत दर्ज चार्जशीट को रद्द करते हुए दहेज उत्पीड़न की धारा में मुकदमा चलाने का सीजेएम मेरठ को आदेश दिया है। 
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मेरठ के आंनद सिंह व अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने सुनवाई की। याची व उसके परिवार के लोगों के खिलाफ मेरठ के प्रतापपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई  गई थी। आरोप है कि उन्होंने शादी के लिए पीड़िता अनु और उसके परिवार वालों पर दबाव डाला और काफी मोटी रकम की मांग कर रहे थे। जिसकी वजह से अनु ने शादी से 15 दिन पूर्व खुद को आग लगा ली।

प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
बाद में उसकी मृत्यु सफदरजंग अस्पताल दिल्ली में हो गई। पुलिस ने इस मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ खुदकुशी के लिए उकसाने की धारा में सीजेएम मेरठ की अदालत में आरोपपत्र प्रस्तुत किया। इसे हाईकोर्ट में यह कहते हुए चुनौती दी गई कि याची व उसके परिवार वालों पर दहेज मांगने का आरोप यदि सही भी मान लिया जाए तब भी उन पर खुदकुशी के लिए उकसाने का कोई केस नहीं बनता है क्योंकि किसी भी गवाह के बयान में ऐसा तथ्य नहीं आया नहीं आया है जिससे पता चला कि आरोपियों ने पीड़िता को आत्महत्या करने के लिए उकसाया था या कोई षडयंत्र किया था।
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court - फोटो : अमर उजाला
कोर्ट ने सभी तथ्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों यहां तक की पीड़िता द्वारा अस्पताल में दिए बयान से भी यह साबित नहीं होता है कि अभियुक्तों ने उसे खुदकुशी के लिए उकसाया है या ऐसा कुछ किया है जिसे दुष्प्रेरणा साबित होती हो। अभियुक्तों की ओर से दहेज की बार-बार मांग करने की वजह से पीड़िता ने डरकर खुदकुशी जैसा कदम उठाया और दुर्भाग्य से उसकी मृत्यु हो गई। मगर इससे अभियुक्तों पर खुदकुशी के लिए उकसाने का आरोप साबित नहीं होता है। कोर्ट ने इसे दहेज उत्पीड़न का मामला मानते हुए आरोपपत्र रद्द कर दिया और सीजेएम को दहेज अधिनियम की धाराओं में अभियुक्तों पर मुकदमा चलाने का निर्देश दिया है।
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