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पुत्रों की लंबी आयु और मंगल कामना के लिए माताओं ने अहोई अष्टमी पर संगम में लगाई डुबकी

Sun, 08 Nov 2020 09:22 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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संगम में लोगों ने लगाई डुबकी - फोटो : अमर उजाला
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अहोई अष्टमी पर रविवार को माताओं ने व्रत रखकर पुत्रों की उन्नति व लंबी उम्र के लिए चांद-तारों को अर्घ्य दिया। चंद्रदर्शन कर मां पार्वती से पुत्र की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना की। इस दौरान संगम तट पर पुण्य की डुबकी लगाने के साथ ही दीपदान किया गया। त्रिवेणी तट पर अहोई माता के नाम पर रखी गईं दीपों की लड़ियां देखते बन रही थीं।

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रविवार को अहोई अष्टमी व्रत रखकर संगम पर हजारों की तादाद में श्रद्धालुओं ने पुण्य की डुबकी लगाई। कार्तिक कृष्ण पक्ष की इस अष्टमी पर कोविड-19 के संक्रमण से बेखौफ होकर श्रद्धालुओं ने संगम पर स्नान, दान किया। जगह-जगह रेती पर शिव -पार्वती की प्रतिमाएं बनाकर मंडप सजाए गए। इस दौरान गंध, अक्षत, पुष्प और नैवेद्य से मां पार्वती का पूजन किया गया।

अहोई अष्टमी
भोर में ही संगम के अलावा रामघाट, काली घाट और दशाश्वमेध घाट के अलावा यमुना के बलुआ घाट पर व्रती महिलाओं की भीड़ लग गई। पुण्य की डुबकी लगाने के बाद व्रतियों ने अहोई अष्टमी व्रत का संकल्प लिया। घरों की दीवारों पर अल्दी-चंदन या फिर गेरू से अहोई माता का चित्र और अल्पनाएं बनाई गईं। इसके बाद मां अहोई की सविधि पूजा की गई।
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अहोई अष्टमी - फोटो : self
मां को हलवा-पूरी का भोग लगाया गया। वेदियों पर प्रतिष्ठापित कलशों पर स्वास्तिक बनाकर अहोई माता की कथाएं भी सुनी गईं। दांपत्य अष्टमी के नाम से जानी जाने वाली अहोई अष्टमी रविावर की सुबह 7:30 बजे आरंभ हुई। सोमवार की सुबह 6:51 बजे तक अष्टमी रहने से देर रात तक पूजा की गई। रात 10:45 बजे चंद्रोदय होने पर व्रती महिलाओं ने चांद, तारों के दर्शन किए। चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया गया।
 
  • संतान सुख और पुत्र की लंबी उम्र के लिए सनातनी परंपरा में अहोई अष्टमी का व्रत श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर अपनई संतान की रक्षा और उनकी दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती हैं। जिन लोगों को संतान नहीं हो रही हो, उनके लिए यह व्रत विशेष फलदायी होता है। जिनकी संतान दीर्घायु न होती हो उनके लिए भी ये व्रत शुभकारी है। पं. ब्रजेंद्र मिश्र, ज्योतिषाचार्य।
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