नकल की पुष्टि होने के बाद कुल 4297 परीक्षार्थियों से आपत्तियां मांगी गईं थीं। ऐसे परीक्षार्थियों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया था। परीक्षार्थियों की आपत्तियों पर विशेषज्ञों की कमेटी ने विचार करने के बाद कार्रवाई की संस्तुति की, जिसके बाद नकल के आरोप में फंसे चार हजार से अधिक परीक्षार्थियों को एक साल के लिए डिबार किए जाने का निर्णय लिया गया।
वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन ने सम सेमेस्टर परीक्षा सत्र 2022-23 के तहत बीए, बीएससी, बीकॉम के 944 परीक्षार्थियों को सात सितंबर तक आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिया है। इनमें 325 परीक्षार्थी सामूहिक नकल और 619 परीक्षार्थी व्यक्तिगत नकल के मामले में फंसे हैं। इन्हें सात सितंबर तक अपने प्रत्यावेदन प्रस्तुत करने हैं।
विशेषज्ञों की कमेटी प्रत्यावेदनों पर विचार करेगी और फिर कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। कुलपति प्रो.अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि सामूहिक नकल के मामले में जो परीक्षा केंद्र चिह्नित किए गए हैं, उनके खिलाफ भी जल्द कार्रवाई की जाएगी। ऐसे परीक्षा केंद्रों को तीन साल के लिए डिबार किया जाएगा और उन पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।