प्रदेश के अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में 20 हजार से अधिक शिक्षकों के पद खाली हैं। प्रदेश का ऐसा कोई विद्यालय नहीं है, जहां दो से पांच शिक्षकों के पद खाली न हों। माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए बना चयन बोर्ड मात्र पुरानी भर्तियों के रिजल्ट निकालने तक ही सीमित है। 2016 के बाद से चयन बोर्ड से कोई नया पद घोषित नहीं किया गया। प्रदेश में मार्च 2017 में नई सरकार के गठन और चयन बोर्ड के पुनर्गठन के बाद भी भर्ती प्रक्रिया गति नहीं पकड़ पाई। चयन बोर्ड के अध्यक्ष सहित कोई अधिकारी यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि जिला विद्यालय निरीक्षकों की ओर से कितने पदों का अधियाचन भेजा गया है।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के पुनर्गठन के बाद से यहां से कोई भर्ती नहीं आई है। चयन बोर्ड के सचिव, परीक्षा नियंत्रक भर्ती कब आएगी इस बारे में कुछ भी बोलने से मना करते हैं। बोर्ड के अध्यक्ष वीरेश कुमार नए पदों के लिए चयन प्रक्रिया कब शुरू होगी, कुछ भी नहीं बताते हैं। ऐसे में प्रदेश में लाखों की संख्या में बीएड बेरोजगार परेशान हैं कि वे क्या करें। तीन वर्ष से चयन बोर्ड से शिक्षकों के कोई पद विज्ञापित नहीं होने से शहर रहकर तैयारी कर रहे बीएड बेरोजगारों के यहां रहने का कोई मायने नहीं रह गया है। परीक्षार्थियों ने चयन बोर्ड से भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग की है।
संस्कृत और संबद्ध प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्ति का काम सौंपा
पहले से ही माध्यमिक विद्यालयों के हजारों पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति नहीं कर पा रहे चयन बोर्ड के जिम्मे प्रदेश सरकार ने प्रदेश के संस्कृत विद्यालयों और माध्यमिक विद्यालयों से संबद्ध प्राथमिक विद्यालयों की नियुक्ति का भी काम दे दिया। प्रदेश के संबद्ध प्राथमिक विद्यालयों में भी 10 हजार से अधिक शिक्षकों के पद खाली हैं और संस्कृत विद्यालयों के लिए भी 1148 पदों का विवरण चयन बोर्ड को भेजा जा चुका है। ऐसे में प्रदेश सरकार की इस कदम से जल्द शिक्षकों के भरे जाने की उम्मीद बीएड बेरोजगारों में नहीं है।