विपक्षी ने एसडीएम के आदेश के खिलाफ कमिश्नर के यहां निगरानी दाखिल की। कमिश्नर ने इसे स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने कहा कि राजस्व न्यायालय के विरुद्ध निगरानी दो ही स्थितियों में सुनी जा सकती है। पहले यह की प्रकरण ऐसे सूट या कार्रवाई से संबंधित हो, जिसे राजस्व न्यायालय की ओर से निर्णीत किया जा चुका हो। दूसरा यह कि निर्णय ऐसे सूट या कार्रवाई से संबंधित होना चाहिए, जिसके खिलाफ अपील का प्रावधान न हो।
निगरानी अदालत का क्षेत्राधिकार इन दो शर्तों पर निर्भर करेगा। कोर्ट ने कहा कि एसडीएम ने निषेधाज्ञा अर्जी निस्तारित नहीं की थी, वह अभी उनके न्यायालय में लंबित है। इस स्थिति में यह मामला निर्णीत वाद की श्रेणी में नहीं आएगा। इसलिए इस अंतरिम आदेश के खिलाफ निगरानी याचिका पोषणीय नहीं है।