अमावस्या पर मेले में ड्रोन और कैमरों से निगरानी होती रही। एटीएस, आरएएफ, पीएसी की कंपनियां गुरुवार रात से तैनात हो गई थीं। संगम पर पीएसी और एसडीआरएफ की बाढ़ राहत कंपनियों की मुस्तैदी से कोई हादसा नहीं हो पाया। भीड़ बढ़ने पर दिन में कई बार डायवर्जन भी किया गया। इस बार अमावस्या पर छह हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।
अमावस्या के मेले पर गुरुवार को ब्रीफिंग के बाद फोर्स को ड्यूटी प्वाइंट्स पर भेज दिया गया था। एडीजी प्रेम प्रकाश, आईजी केपी सिंह, एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज आदि अधिकारी दिन भर भ्रमण पर रहे और व्यवस्था देखते रहे। करीब पौने दो सौ कैमरों और दो ड्रोन से चप्पे चप्पे की निगरानी होती रही। कैमरों की मदद से भीड़ बढ़ने पर कई बार डायवर्जन भी किए गए। मेले के नोडल अधिकारी एसपी आशुतोष मिश्रा ने बताया कि दिन में जहां भी आवश्यकता हुई, प्लान में तब्दीली की गई थी। संगम पर फ्लोटिंग बैरियर्स के बगल में जाल लगा दिया गया था। उस पर प्राइवेट गोताखोरों को लगाया गया था। पीएसी के बाढ़ राहत दल और एसडीआरएफ की टीमें संगम पर निगाह बनाए हुए थीं, ताकि कोई हादसा न हो। नावों से गश्त लगाई जा रही थी। इस बार मेले में आने और जाने के पूरे रास्तों को अलग कर दिया गया था। प्लान इस तरह था कि कहीं भी आने और जाने वालों का आमना-सामना न हो। प्लान पूरी तरह सफल भी रहा।
मेले में मिलिट्री पुलिस, एटीएस, आरएएफ, बीडीडीएस, एएस टीम और केंद्र और राज्य के खुफिया विभाग के लोग भी तैनात थे। स्नाइफर डाग और फील्ड यूनिट संदिग्ध लोगों की चेकिंग करते रहे। संदिग्ध लोगों और सामानों की चेकिंग के लिए पुलिस टीमें लगातार अभियान चलाती रहीं। तमाम लोगों से पूछताछ की गई। उनके बैग आदि की तलाशी भी ली गई। हालांकि कोई संदिग्ध चीज नहीं मिली।