इलाहाबाद। शहर के ज्यादातर लोग शुक्रवार सुबह जब सोकर उठे भी नहीं रहे होंगे तब घूरपुर के मोहददीपुर गांव में महज चार रुपयों के चक्कर में दो कत्ल के साथ ही भारी बवाल शुरू हो चुका था। खबर पाकर मौके पर पहुंचे पुलिस अफसरों के लिए भी हिंसा पर उतारू भीड़ को काबू में करना बेहद मुश्किल भरा रहा। भीड़ पुलिस से भी सीधे टकराव पर आमादा थी। पुलिस के सामने घर में फंसे नौ लोगों की जान बचाने की चुनौती थी। आईजी और एसएसपी ने खुद सुरक्षा घेरा बनाकर हिंसक भीड़ के बीच से नौ लोगों को घर से निकाल थाने भेजा वरना घटना और गंभीर हो जाती।
मोहद्दीपुर में घटना की जानकारी पाकर पहले घूरपुर थानाध्यक्ष बिहागड़ सिंह यादव मौके पर पहुंचे मगर वहां के हालात देख वह घबरा गए। भीड़ चक्की मालिक राकेश के घर पर पथराव करते हुए दरवाजा तोड़ने की कोशिश कर रही थी। भीड़ को तत्काल काबू में करना जरूरी था वरना राकेश के घर का दरवाजा टूटने पर कई लोगों की जान जा सकती थी। घूरपुर पुलिस ने हालात की गंभीरता के बारे में बताया तो अफसर भी सन्न रह गए। एसपी यमुनापार आशुतोष मिश्र तीन थानों की पुलिस के साथ पहुंचे तो दोहरे कत्ल से उग्र भीड़ के तेवर देख उन्होंने एसएसपी को जानकारी दी।
उस वक्त आईजी जोन ब्रजभूषण शर्मा पुलिस लाइन में परेड का निरीक्षण करने पहुंचे थे। एसएसपी बीपी श्रीवास्तव भी उनके साथ थे। आईजी और एसएसपी भी फौरन शहर के कई थानों की फोर्स और तीन सीओ के साथ घटनास्थल को रवाना हो गए। आईजी, एसएसपी, एसपी यमुनापार कई सीओ और डेढ़ दर्जन थानों की फोर्स की मौजूदगी में भी भीड़ का गुस्सा चरम पर था। ऐसे में दो कत्ल से गुस्साए लोगों को शांत कराने की कोशिश के साथ ही आईजी और एसएसपी ने घर में फंसे हमलावर परिवार को बाहर निकालने का भी अभियान चलाया। एसपी यमुनापार ने चार थानेदारों और तीन दर्जन से ज्यादा सिपाहियों के साथ सुरक्षा घेरा बनाकर राकेश द्विवेदी और उसके तीन भाइयों परिवार की महिलाओं-बच्चों को भीड़ से बचाकर घर से थाने भेजा। पुलिस बल ने स्थिति संभाली तब दमकल की गाड़ियां लेकर आए अग्निशमन कर्मचारियों को चक्की और पशु बाड़ा में लगी आग बुझाने का मौका मिला।