नगर निगम में लाखों रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है। शहर में अतिक्रमण और अवैध रूप से खड़े वाहनों को क्रेन से उठाने वाले निगम कर्मचारियों ने ये बड़ा ‘खेल’ किया है। आरोपी कर्मचारी वसूली तो रोज करते हैं, लेकिन रकम निगम के कोषागार में जमा नहीं करते। प्रथम दृष्टया जांच में मामला पकड़ में आया तो आरोपी जिलेदार और कर्मचारियों को नोटिस जारी कर रसीद बुक जमा कराने को कहा गया है। नजूल अधीक्षक और खजांची को भी लापरवाही के आरोप में नोटिस जारी की गई। वहीं वर्ष भर में वसूली गई रकम और रसीद बुक जमा न कराने वाले निगम कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। मामले की जानकारी नगर आयुक्त अविनाश सिंह को दी गई है।
अपर नगर आयुक्त प्रथम ऋतु सुहास के मुताबिक बुधवार को नजूल विभाग की वसूली समीक्षा के दौरान गड़बड़ी सामने आई। सड़क पर अवैध रूप से पार्क वाहनों को क्रेन से उठाने के लिए तैनात कर्मचारियों ने निगम कोष में 23 मई के बाद जमा नहीं कराई थी। यह देख नजूल प्रभारी समेत कर्मचारियों को तलब कर रसीद मंगाई गई। इधर पूछताछ चल रही थी और उधर एक कर्मचारी ने खजांची से मिलकर देर शाम 65000 हजार रुपये कोषागार में जमा करा दिए। तमाम प्रयास के बाद अतिक्रमण के नाम पर वसूली करने वाले पांच जिलेदार करीब वर्ष भर में बतौर जुर्माना वसूली गई रकम का ब्यौरा नहीं दे पाए। किसी ने वसूली बुक भी नहीं प्रस्तुत की, जबकि इधर लगभग हर दिन अतिक्रमण करने वालों से हजारों की वसूली की जा रही है। लगभग साल भर से वसूली जा रही यह रकम लाखों में है।
इस मामले में नजूल प्रभारी लालमणि यादव, मुख्य खजांची अनिल कुमार शर्मा को पत्र जारी कर पूछा गया है कि अवैध पार्किंग की वसूली करने वाले नायब मोहर्रिर विकास सारस्वत ने हर दिन प्रपत्र 13 पर वसूली गई धनराशि जमा नहीं की तो इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को क्यों नहीं दी गई। 23 से 30 मई के बीच वसूली के 65000 रुपये बिना लेखाधिकारी या अफसरों की अनुमति के बुधवार देर शाम कैसे कराए गए।
आयुक्त ऋतु सुहास ने बताया कि नियमत: हर दिन बतौर जुर्माना वसूल की जाने वाली धनराशि निगम के कोषागार में जमा कराने के निर्देश हैं। जबकि ऐसा नहीं किया गया। मामले में दो अफसरों और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई है।