मोती लाल मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों के साथ हुई रैगिंग के मामले से बुधवार को हड़कंप की स्थिति रही। मारपीट, धमकी और शारीरिक उत्पीड़न से छात्र दहशत में रहे। वे परिसर और कक्षाओं में सिर झुकाकर ही पहुंचे। कॉलेज प्रशासन भी हरकत में आया। सहायक वार्डेन कमांडो दल के साथ सुबह से रात तक चार बार हॉस्टल घूमे। उधर, जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए रैगिंग मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को कुछ सीनियर छात्रों ने सिर उठाकर चलने पर एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों को मेस में ले जाकर मुर्गा बनाया था और उनकी लात-घूंसों से पिटाई की थी। मेडिकल कॉलेज में छात्रों की रैगिंग का खुलासा अमर उजाला ने ही किया था। मामले का संज्ञान लेते हुए कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. वत्सला मिश्रा ने सुबह ही वार्डेन और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े लोगों संग बैठक की। उन्होंने निर्देश दिया कि नवप्रवेशी छात्रों को बताया जाए कि वे रैगिंग के नाम पर मारपीट करने वालों के नाम उजागर करें। उनके नाम गुप्त रखे जाएंगे। उन्होंने सहायक वार्डेन और कमांडो दल को हॉस्टलों, लेक्चर रूम का भ्रमण कर जानकारी जुटाने को कहा। कुछ मेडिकल छात्रों से पूछताछ भी की गई।
सहायक वार्डेन डॉ. संतोष ने बताया एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों से मुलाकात कर जानकारी ली गई है। किसी ने शिकायत नहीं की है। हॉस्टलों में भी राउंड लेकर छात्रों को रैगिंग के नाम पर उत्पीड़न करने वालों के बारे में सूचना देने का कहा गया है। कक्षाओं के बाहर भी निगरानी बढ़ाई गई है। हालांकि कई बार हुए निर्णय के बाद भी मेडिकल कॉलेज के लेक्चर रूम के भीतर और बाहर, छात्रावासों में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए जा सके हैं। सीसीटीवी कैमरे लगे होते तो रैगिंग के नाम पर मेडिकल छात्रों के साथ मारपीट करने वालों की पहचान और कार्रवाई आसान हो जाती।
जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने मेडिकल कालेज में रैगिंग मामले की पड़ताल और छात्रों को ढांढस बंधाने के लिए एडीएम सिटी की अगुवाई में एसीएम और इलाकाई सीओ को फोर्स के साथ मेडिकल कॉलेज के हॉस्टलों में जाने को कहा है। उन्होंने कहा कि नवप्रवेशी बच्चे कुछ बोलें या चुप रहें, जिम्मेदारी से बचने वालों से भी पूछताछ की जाएगी। सुरक्षा उपायों की समीक्षा भी कराई जाएगी।
मेडिकल कॉलेज में मंगलवार को छात्रों को रैगिंग के नाम पर धमकाने, मारने पीटने, मुर्गा बनाने और शारीरिक उत्पीड़न करने वाले छात्र अमर उजाला में सच्चाई उजागर होने के बाद सकते में आए हैं। बावजूद इसके वे बाज नहीं आए हैं। आरोपियों ने प्रथम वर्ष के छात्रों के पास अपने कुछ साथियों को भेजा, जो रैगिंग में शामिल नहीं थे। भुक्तभोगी छात्रों के मुताबिक बुधवार को उनसे जो लोग मिले वे सीनियर लग रहे थे। उन लोगों से कहा गया, जो हुआ, उसे भूल जाओ। जिसने ये सब किया, उन्हेें समझा दिया जाएगा। कुछ बोलना नहीं, बोले तो खैर नहीं...कॅरियर चौपट समझना। कोई कुछ पूछे तो कहना कि सिर्फ परिचय के लिए नाम ही पूछा गया था।