उत्तर भारत में लाइव डोनेश के प्रति जागरूकता जरुरी
प्रो. प्रीतम दास की स्मृति में मल्टी ट्रांसप्लांट पर जानकारी देते हुए अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग में ट्रांसप्लांट सर्जरी के प्रमुख विशेषज्ञ प्रो. (डॉ.) अजय खन्ना ने कहा कि शुगर व बीपी जैसे कुछ बीमारियों के लम्बे समय तक रहने पर किडनी खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। जिसकी वजह से लिवर व हार्ट के भी ट्रांसप्लांट की नौबत हा सकती है। ऐसे में बीमारी का समय रहते सामने आना जरूरी है। इसके अलावा मल्टी ट्रांसप्लांट के संबंध में चिकित्सक को प्रशिक्षित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में लोगों को लाइन डोनेश के प्रति जागरूक होना चाहिए।
जांच लिखने से पहले मरीज का नाड़ी परीक्षण जरूरी
प्रो. आरके अग्रवाल की स्मृति में व्याख्यान देते हुए सर्जन एसोसिएशन के अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रभारी एवं पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष (डॉ.) प्रोबाल नियोगी ने कहा कि युवा चिकित्सकों को चाहिए कि वह मरीज को तमाम प्रकार की जांच लिखने से पहले उसका ठीक ढंग से परीक्षण कर लें। जैसे पहले चिकित्सक मरीज की नाड़ी और सीना, आंख, जीभ का परीक्षण करते थे। वहीं आवश्यकता पड़ने पर ही जांच लिखी जाती थी। इस प्रकार की चिकित्सकीय पद्धति अपनाने से मरीज का उपचार बेहतर दिशा में होता है।