भारी अव्यवस्था और अनियमितता की शिकार इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षाओं में शुक्रवार को तो पेपर ही वायरल हो गया। परास्नातक प्रवेश परीक्षा (पीजीएटी) को शुरू होने के कुछ देर बाद सामान्य अध्ययन का प्रश्नपत्र लोगों के मोबाइल पर पहुंच गया। कई अभ्यर्थियों के मोबाइल पर भी पेपर पहुंच गया था। इससे परीक्षार्थियों में जबरदस्त आक्रोश है। इसके विपरीत विश्वविद्यालय प्रशासन ने किसी तरह की अनियमितता तथा पेपर आउट होने की बात से इंकार किया है। हां, अफसरों ने पेपर वायरल होने की बात जरूर स्वीकार की।
पीजीएटी पहली पारी में सुबह नौ से 12 बजे के बीच थी। गौर करने वाली बात यह रही कि इस बार अभ्यर्थियाें को अधिकतम पांच विषयों की परीक्षा में शामिल होने का मौका दिया गया। पांचों विषय के लिए आवेदन करने वालों की सुबह नौ बजे से परीक्षा थी। चार विषय के अभ्यर्थियों की 9.30, तीन विषय वालों की 10, दो विषय वालों की 10.30 तथा एक विषय के लिए आवेदन करने वालों की परीक्षा 11 बजे से थी। विषय के अलावा अभ्यर्थियों को सामान्य अध्ययन के पेपर की परीक्षा देनी थी, लेकिन सुबह नौ बजे परीक्षा शुरू होने के कुछ देर बाद सामान्य अध्ययन का पेपर व्हाट्सअप के माध्यम से लोगों के मोबाइल पर वायरल हो गया। कहा जा रहा है कि परीक्षा के दौरान मोबाइल से पेपर वायरल हुआ है। परीक्षा देकर निकले अभ्यर्थियों ने मोबाइल से नकल की भी शिकायत की।
गौर करने वाली बात यह है कि बृहस्पतिवार को संयुक्त शोध प्रवेश परीक्षा (क्रेट) में भी मोबाइल से व्यापक स्तर पर नकल की शिकायत हुई थी। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन नहीं चेता और शुक्रवार को फिर अभ्यर्थी परीक्षा कक्ष में मोबाइल तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ले जाने में सफल रहे। इसका नतीजा रहा कि परीक्षा छूटने से काफी पहले ही पेपर आउट हो गया। उधर, प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक प्रोफेसर बीएन सिंह का कहना है कि पेपर आउट नहीं हुआ है। जिनकी परीक्षा 11 बजे से थी वे भी सवा दस बजे तक परीक्षा कक्ष में जा चुके थे। सवा दस बजे के बाद कोई भी अभ्यर्थी प्रवेश नहीं किया और पेपर इसके बाद वायरल हुआ। इसलिए पेपर आउट नहीं हुआ है। ऐसे में पेपर वायरल होने का किसी को लाभ भी नहीं पहुंचा। परीक्षा में किसी तरह की अन्य शिकायत भी नहीं है।