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विवादों पर अर्द्धकुंभ से पहले सभी शंकराचार्य बनाएं आम राय

Sun, 18 Jun 2017 01:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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अखिल भारतीय दंडी सन्यासी प्रबंध समिति की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक शनिवार को पुरानी झूंसी के कोहना गांव स्थित टीकरमाफी आश्रम में स्वामी हरिचैतन्य जी महाराज की अध्यक्षता में हुई। इसमें जगद्गुरु शंकराचार्यों के विवाद समेत कई बिंदुओं पर गंभीरता से चर्चा कर प्रस्ताव पारित किए गए। शंकराचार्यों के विवादों पर गंभीरता से चर्चा हुई। प्रस्ताव में कहा गया कि अगर अर्द्धकुंभ से पहले शंकराचार्य अपने विवादों को लेकर आम राय नहीं बनाते तो सभी के बोर्ड और बैनर हटा दिए जाएंगे। बैठक में दंडी सन्यासी प्रबंध के विस्तारीकरण का भी प्रस्ताव पारित किया गया।
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 राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में देश भर से दंडी स्वामी जुटे। इसमें चार बिंदुओं पर चर्चा कर प्रस्ताव पारित किए गए। अध्यक्षता करते हुए स्वामी हरिचैतन्य जी महाराज ने दंडी सन्यासियों की लगातार घट रही संख्या पर गहरी चिंता जताई। कहा कि हमें दंडी स्वामियों की संख्या बढ़ाने के लिए गंभीरता से प्रयास करना होगा। बैठक के तीन बिंदुओं में सबसे अहम जगद्गुरु शंकाराचार्यों के बीच चल रहा विवाद रहा। समिति ने प्रस्ताव पारित किया कि अर्द्धकुंभ से पहले अगर इनके बीच आम राय नहीं बनती तो सभी के बोर्ड बैनर हटा दिए जाएंगे। यह भी कहा गया कि सनातन परंपरा में आद्य गुरु शंकराचार्य भगवान के सभी शिष्य आचार्य ही लिखें। सभी शंकराचार्य भी दंडी स्वामी समाज में ही आते हैं। इसलिए शंकराचार्यों के विवाद के निस्तारण का अधिकार अखिल भारतीय दंडी सन्यासी प्रबंध समिति को ही है।

धर्म सम्मत आधार पर अखाड़ा परिषद् या अन्य किसी को भी इन मामलों में अनुपयुक्त बोलने का अधिकार नहीं है। अखिल भारतीय दंडी सन्यासी प्रबंध समिति के विस्तारीकरण के लिए प्रांतीय समितियों के गठन की बात कही गई। माघ मेले और अर्द्धकुंभ मेले में सलाहकार समिति की बैठकों की जानकारी प्रशासन की ओर से दंडी सन्यासी समिति को सदस्य बनाकर दी जाए। दंड सन्यासी समिति में मार्गदर्शक मंडल बनाने का भी निर्णय लिया गया। इसमें कम से कम पांच और अधिक से अधिक ग्यारह श्रेष्ठ संतों को रखा जाएगा। बैठक में मध्य प्रदेश से स्वामी हेमेंद्रानंद सरस्वती, राजस्थान के स्वामी रामेश्वराश्रम, दिल्ली से दिव्यस्वरूप जी, पंजाब से दिनेशाश्रम, गुजरात से शिवबोध आश्रम, हरिद्वार से प्रणवानंद, पश्चिम बंगाल से बाणेश्वरानंद तीर्थ समेत अन्य जिलों से प्रतिनिधि शामिल हुए।
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