कुंभ में करोड़ों श्रद्धालुओं के पार उतरने के लिए गंगा पर पांटून पुलों का निर्माण शुरू होने के साथ ही गड़बड़ी की परतें भी खुलने लगी हैं। बृहस्पतिवार को गंगोली शिवाला घाट पर पुल निर्माण के लिए लाया गया पीपा क्रेक होने की वजह डूब गया। डंपर से उतारकर गंगा में डाले जाने के बाद जोड़ाई से पहले ही पीपा डूबने लगा। मजदूरों की सूचना पर जेई-ठेकेदार मौके पर पहुंचे। इस घटना से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। कुंभ मेलाधिकारी विजय किरन आनंद के अनुसार पीपा डूबने के कारणों का पता लगाया जा रहा है। किसी भी स्तर पर लापरवाही या चूक नहीं होने दी जाएगी। टेस्टिंग के बाद ही पीपे लगाए जाएंगे।
दारागंज के सामने गंगोली शिवाला घाट पांटून पुल का निर्माण हाल में ही शुरू कराया जा रहा है। पीडब्ल्यूडी के यांत्रिक खंड की ओर से टेस्टिंग के बाद गंगा में अस्थाई पुल निर्माण के लिए पीपा परेड ग्राउंड के कारखाना स्थल से लाया जा रहा है। बृहस्पतिवार की सुबह परेड से गंगोली शिवाला घाट पर ले जाया गया पीपा गंगा डालने के बाद डूबने लगा। इससे वहां मौजूद कर्मियों और मजूदूरों के होश उड़ गए। इस पीपे का निर्माण किस कंपनी की ओर से कराया गया था, पीडब्ल्यूडी यांत्रिक खंड के एक्सईएन यूके सिंह इसका जवाब नहीं दे सके। अलग-अलग कंपनियों की ओर से पीपा बनाकर हाल में ही यांत्रिक खंड को हैंडओवर किया गया है। ऐसे में वह पीपा किस फर्म ने बनाकर दिया था, इस पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी। कहा जा रहा है कि हाल में ही टेस्टिंग के बाद इस पीपे को यांत्रिक खंड को हस्तांतरित किया गया था। यांत्रिक खंड की टेस्टिंग टीम की ओर से पास करने के बाद ही पीपा पुल निर्माण के लिए भेजा गया था।
कहा जा रहा है कि पीपा गंगा में डाले जाने के बाद क्रेक होकर फट गया। गर्डर जोड़ने के लिए बनाए गए सैडिल के ज्वाइंट के पास पहले से प्लेट कमजोर होने की वजह से पीपा क्रेक होने की बात कही जा रही है। 74.73 करोड़ रुपये की लागत से कुंभ के लिए 1211 पांटून, 8925 आरएस ज्वाइस्ट और 21987 रेलिंग पोस्ट का निर्माण कराया जा रहा है। इस पांटून से अरैल से फाफामऊ के बीच गंगा पर 22 अस्थाई पांटून पुलों का निर्माण कराया जाना है। हाल में ही मुख्यमंत्री ने दो दिवसीय प्रयागराज प्रवास के दौरान परेड स्थित यांत्रिक खंड के कारखाने में रात को जाकर पांटून पुलों केनिर्माण की स्थिति देखी थी। तब सीएम ने खुद अफसरों को आगाह किया था कि किसी भी तरह की लापरवाही पांटून के निर्माण में न बरती जाए। इसलिए कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा से जुड़ा मामला है, लेकिन पांटून पुल निर्माण की शुरुआत में ही पीपा डूबने से पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। कहा जा रहा है कि समय रहते अगर कुंभ मेला प्रशासन ने गंभीरता नहीं बरती तो आने वाले समय में थोड़ी सी चूक बड़ी मुसीबतों की वजह भी बन सकती है।
कुंभ में गंगा पर अस्थाई पुल निर्माण के लिए पीपा, आरएस ज्वाइस्ट और रेलिंग पोस्ट बनाने के लिए चह कंपनियों को ठेका दिया गया है। कुछ पीपे का निर्माण यांत्रिक खंड ने भी कराया गया है। बृहस्पतिवार को गंगा में क्रेक होकर डूबने वाले पीपा किस फर्म की ओर से निर्मित किया गया था, इस पर यांत्रिक खंड के अभियंता फिलहाल चुप्पी साधे हुए। एक्सईएन यूके सिंह ने पहले तो फर्म का नाम कुछ देर में बताने के लिए हामी भरी, लेकिन बाद में वह फोन रिसीब करने से बचते रहे। यहां तक कि इस मसले पर पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता हिमांशु मित्तल और एक्सईएन कुंभ मेला विपिन पचौरिया ने भी खामोशी अख्तियार कर ली। जिन फर्मों को पीपा बनाने का ठेका दिया गया है, उनमें मेसर्स नादर्न कांस्ट्रक्शन कंपनी, मेसर्स प्रसाद एंड कंपनी, मेसर्स इंजीनियरिंग कांस्ट्रक्शन कंपनी, मेसर्स त्रिमूर्ति इंजीनियर्स, मेसर्स सूर्या कांस्ट्रक्शन कंपनी, मेसर्स तारा सिंह जायसवाल, मेसर्स गुरु प्रकाश राव, मेसर्स त्रिवेणी स्ट्रक्चरल इंटर प्राइजेज, मेसर्स इलाहाबाद कांस्ट्रक्शन वर्क्स, मेसर्स कृष्णा कांस्ट्रक्शन कंपनी और मेसर्स खुशबू इंजीनियरिंग वर्क्स के नाम शामिल हैं। कहा जा रहा है कि पीपे में अगर बालू भर गई तो उसे क्रेन केसहारे बाहर निकालना और गड़बड़ी की जांच करना भी कठिन हो जाएगा।
गंगोली शिवाला घाट पर हुई घटना का पता लगाया जा रहा है। पांटून पुल निर्माण में इस्तेमाल किए जाने वाले पीपे की टेस्टिंग कराई जाएगी। गड़बड़ी पकड़ी गई तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। विजय किरन आनंद, कुंभ मेलाधिकारी- प्रयागराज।
पीपा डंपर से उतारे जाने के दौरान वहां पहले से पड़े पीपे के सैडिल पर गिर गया था। इस वजह से क्रेक हो गया। यूके सिंह, एक्सईएन- पीडब्ल्यूडी यांत्रिक खंड।