नई और पुरानी झूंसी के तटवर्ती इलाके दोबारा हैं बाढ़ की चपेट में
गंगा-यमुना के दोबारा बढ़ते जलस्तर के बीच झूंसी के तटवर्ती इलाके में रहने वाले लोगों की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है। नई तथा पुरानी झूंसी के तटवर्ती इलाके में स्थित आधा दर्जन आश्रम, मठ, मंदिर और मकानों में दोबारा बाढ़ का पानी दाखिल हो गया है। यहां रहने वाले लोग एक बार फिर या तो सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं या फिर मकान व आश्रम के ऊपरी मंजिल में ठिकाना बनाए हुए हैं।
इन इलाकों में अब तक प्रशासनिक सहायता भी नहीं पहुंची है। बुधवार को बिजली विभाग ने यहां की बिजली दोबारा काट दी। उधर, बाढ़ से घिरे कछार के एक दर्जन गांव के ग्रामीणों के लिए दोबारा बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। बाढ़ का पानी बढ़ने पर यहां एक बार फिर से ग्रामीणों के आवागमन के लिए बड़ी नाव लगा दी गई है।
मंगलवार की दोपहर से ही गंगा और यमुना के जलस्तर बढ़ने लगा था। इसके साथ ही झूंसी के तटवर्ती इलाकों में स्थित आश्रम, मठ, मंदिर और कई मकान दोबारा बाढ़ की जद में आ गए हैं। ऐसे में यहां रहने वाले साधु-संतो और लोगों ने ऊपरी मंजिल में ठिकाना बनाया है या फिर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। पुरानी झूंसी स्थित त्रिवेणी आश्रम, टीकरमाफी आश्रम, आरएसएस कार्यालय, सतुआ बाबा आश्रम, गीता धाम तथा क्रियायोग आश्रम के निचले हिस्से में बाढ़ का पानी दाखिल हो गया है।
इन इलाकों की बुधवार को दोबारा बिजली काट दी गई। अवर अभियंता अरविंद कुमार ने बताया कि दो बिजली के खंभों की बिजली काटी गई है। इससे तकरीबन सवा सौ मकानों और आश्रम में बिजली आपूर्ति ठप्प पड़ गई है। उधर, बदरा-सोनौटी मार्ग पर पानी डेढ़ से दो फीट तक बढ़ गया था। यहां के बदरा, सोनौटी, ढोलबजवा, बहादुरपुर, गंजिया, हेतापट्टी, इब्राहिमपुर, खजुरी, फतेहपुर, एकलासपुर, मदारपुर, पैगंबरपुर, फैज्जुलापुर, सकरा, इब्राहिमपुर समेत तकरीबन डेढ़ दर्जन से ज्यादा गांव दोबारा बाढ़ की चपेट में हैं।
बदरा-सोनौटी गांव बिजली कटने से फिर से अंधेरा भी पसर गया है।केरोसिन का इंतजाम अब तक प्रशासन की ओर से नहीं किया गया है। इससे ग्रामीण अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति असंतोष व्याप्त है। एक बार फिर बुधवार से बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नाव से आवागमन करते रहे। ओवरलोड नाव के कारण हादसे की संभावना भी बनी हुई थी। इससे प्रशासन और इलाकाई पुलिस उदासीन बनी रही।