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Narendra Giri Suicide Case: एक नहीं, चार बनेंगे उत्तराधिकारी, बलबीर गिरि हो सकते हैं बाघंबरी मठ के महंत

Wed, 22 Sep 2021 10:04 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध हाल में मौत के मामले में उनका शिष्य रहा आनंद गिरि को गिरफ्तार कर लिया गया। उसे हरिद्वार से प्रयागराज लाकर सीधे पुलिस लाइन ले जाया गया, जहां दिन भर पूछताछ चलती रही। 
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महंत नरेंद्र गिरी आत्महत्या मामला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत के बाद अब उनके उत्तराधिकार को लेकर बहस छिड़ गई है। उनकी मौत के बाद अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष समेत चार अहम पद रिक्त हो गए हैं। अब उनके बाद इन पदों पर किसकी ताजपोशी होगी, इसे लेकर कयासबाजी शुरू हो गई है। हालांकि सुसाइड नोट को आधार माना जाए तो हरिद्वार में रह रहे बलबीर गिरि बाघंबरी मठ के महंत होंगे।
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आनंद गिरि से विवाद के समय ही महंत नरेंद्र गिरि ने साफ कर दिया था कि बाघंबरी मठ और निरंजनी अखाड़ा दोनों अलग-अलग संस्थाएं हैं। बाघंबरी मठ उनकी अपनी संपत्ति है और वह उनके नाम से अभिलेखों में दर्ज है।

ऐसे में सुसाइड नोट में लिखे उत्तराधिकारी के नाम को लेकर महंतई चादर पर विचार किया जा सकता है। इस आधार पर अगले महंत बलबीर गिरि हो सकते हैं। बकि, बड़े हनुमान मंदिर के व्यवस्थापक की जिम्मेदारी अमर गिरि पवन महाराज को पहले ही सौंपी जा चुकी है।
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इसी तरह नरेंद्र गिरि की मौत से रिक्त हुए निरंजनी अखाड़े के सचिव पद को भरने के लिए अखाड़े की ओर से संतों की ओर से बैठक बुलाई जाएगी, ताकि इस पर निर्णय किया जा सके। इन सबके बीच सबसे अहम है अगले अखाड़ा परिषद अध्यक्ष का नाम तय करना। महंत हरि गिरि के अनुसार इस मसले को अखाड़ा परिषद ही तय करेगा। इसके लिए परिषद की बैठक बुलाई जाएगी। 

सुसाइड नोट की सत्यता को परखना जरूरी: महंत हरि गिरि
देर शाम अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि ने अमर उजाला से कहा कि निरंजनी अखाड़ा ही उनके उत्तराधिकार के मसले को तय करेगा। हरि गिरि ने सुसाइड नोट में दिए गए उत्तराधिकारी के नाम और उसकी सत्यता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि सीएम के हस्तक्षेप पर बुधवार को ही समाधि दी जाएगी। समाधि के बाद उनका पहला लक्ष्य है कि हत्यारे पकड़े जाएं और उनको सजा दिलाई जाए।
 
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फांसी पर लटके मिले थे नरेंद्र गिरि

आपको बता दें कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि सोमवार को संदिग्ध हालत में फांसी पर लटके मिले थे। बांघबरी मठ स्थित एक कमरे में उनका शव फंदे पर लटका मिला था। मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला था, जिसमें अपमान से आहत होकर कदम उठाने समेत अन्य बातें लिखी हैं। 

महंत नरेंद्र गिरि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष होने के साथ ही बाघंबरी मठ के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़े के सचिव भी थे। बंधवा स्थित हनुमान मंदिर के वह बड़े हनमंत भी थे। शिष्यों के मुताबिक, दोपहर तक सब सामान्य था। रोज की तरह सोमवार दोपहर भी महंत ने शिष्यों संग भोजन ग्रहण किया। इसके बाद मठ परिसर में ही बने एक कमरे में यह कहते हुए चले गए कि वह आराम करने जा रहे हैं। आमतौर पर वह शाम चार बजे के करीब बाहर आकर शिष्यों व अन्य पदाधिकारियों के साथ बैठ जाते थे। लेकिन पांच बजे तक भी वह बाहर नहीं आए। इस पर बबलू नाम का सेवादार उन्हें जगाने पहुंचा।

बहुत देर तक आवाज देने पर भी वह बाहर नहीं आए तो उसने आश्रम में ही रहने वाले सुमित नाम के शिष्य को बुलाया। दोनों ने धक्का दिया तो कुंडी टूट गई। जैसे ही दरवाजा खुला, भीतर का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए। महंत फांसी पर लटके हुए थे। उन्होंने शोर मचाया तो अन्य शिष्य व आश्रम में रहने वाले पदाधिकारी आ गए। रस्सी काटकर शव फंदे से नीचे उतारा गया लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। सूचना पर आईजी, कमिश्नर, डीएम, डीआईजी समेत पूरा प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंच गया। 
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