महंत नरेंद्र गिरि की मौत के बाद अब उनके उत्तराधिकार को लेकर बहस छिड़ गई है। उनकी मौत के बाद अखिल भारतीय अख्राड़ा परिषद अध्यक्ष समेत चार अहम पद रिक्त हो गए हैं। अब उनके बाद इन पदों पर किसकी ताजपोशी होगी, इसे लेकर कयासबाजी शुरू हो गई है। हालांकि सुसाइट नोट को आधार माना जाए तो हरिद्वार में रह रहे बलबीर गिरि बाघंबरी मठ के महंत होंगे।
बाघंबरी गद्दी मठ के अगले महंत को लेकर अंदरखाने कशमकश तेज हो गई है। आनंद गिरि से विवाद के समय ही महंत नरेंद्र गिरि ने साफ कर दिया था कि बाघंबरी मठ और निरंजनी अखाड़ा दोनों अलग-अलग संस्थाएं हैं। बाघंबरी मठ उनकी अपनी संपत्ति है और वह उनके नाम से अभिलेखों में दर्ज है। ऐसे में सुसाइट नोट में लिखे उत्तराधिकारी के नाम को लेकर महंतई चादर पर विचार किया जा सकता है। इस आधार पर अगले महंत बलबीर गिरि हो सकते हैं।
बकि, बड़े हनुमान मंदिर के व्यवस्थापक की जिम्मेदारी अमर गिरि पवन महाराज को पहले ही सौंपी जा चुकी है। इसी तरह नरेंद्र गिरि की मौत से रिक्त हुए निरंजनी अखाड़े के सचिव पद को भरने के लिए अखाड़े की ओर से संतों की ओर से बैठक बुलाई जाएगी, ताकि इस पर निर्णय किया जा सके। इन सबके बीच सबसे अहम है अगले अखाड़ा परिषद अध्यक्ष का नाम तय करना। महंत हरि गिरि के अनुसार इस मसले को अखाड़ा परिषद ही तय करेगा। इसके लिए परिषद की बैठक बुलाई जाएगी।
सुसाइट नोट की सत्यता को परखना जरूरी: महंत हरि गिरि
देर शाम अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि ने अमर उजाला से कहा कि निरंजनी अखाड़ा ही उनके उत्तराधिकार के मसले को तय करेगा। हरि गिरि ने सुसाइट नोट में दिए गए उत्तराधिकारी के नाम और उसकी सत्यता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि सीएम के हस्तक्षेप पर बुधवार को ही समाधि दी जाएगी। समाधि के बाद उनका पहला लक्ष्य है कि हत्यारे पकड़े जाएं और उनको सजा दिलाई जाए।
बाघंबरी गद्दी मठ में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल जिस कमरे में फंदे से लटकता हुआ महंत का शव मिला, वह उसमें कभी सोते ही नहीं थे। इसके अलावा उस कमरे से अटैच बाथरूम का एक दरवाजा बाहर की ओर भी खुलता है। ऐसे में भीतर से लॉक रहने के बावजूद उस कमरे से कोई भी बाहर निकल सकता है। ऐसे में महंत की मौत की गुत्थी और भी उलझ सकती है।
महंत नरेंद्र गिरि का फंदे से लटकता शव मठ परिसर में मीटिंग हाल के ठीक सामने वाले कक्ष में मिला था। कहा जा रहा है कि महंत का शयन कक्ष बाघंबरेश्वर महादेव मंदिर की पहली मंजिल पर था। उसी में वह सोते और आराम भी करते थे। जिन कमरे में उनका शव मिला, उसमें वह रहते नहीं थे। खुफिया विभाग की टीम ने भी जब उस कमरे की पड़ताल की तब पता चला कि उस कक्ष से अटैच बाथरूम का एक दरवाजा ऐसा भी है, जो बाहर की ओर खुलता है। ऐसे में कक्ष का दरवाजा भीतर से बंद रखने के बाद भी कोई व्यक्ति वहां से बाथरूम के रास्ते से बाहर निकल सकता है। ऐसे में नरेंद्र गिरि की मौत को लेकर सवाल उठना लाजिमी है।
रामजन्मभूमि विवाद के पक्षकार रहे निर्वाणी अनी अखाड़े के महंत धर्मदास मंगलवार को नरेंद्र गिरि के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए जब पहुंचे, तब उन्होंने भी इसका जिक्र किया। महंत धर्मदास का कहना था कि जिस कमरे में उनका शव मिला है, उसमें वह कभी नहीं सोते थे। महंत धर्मदास का कहना था कि उनकी हत्या कर शव को वहां लाकर लटकाया गया, ताकि इस घटना को आत्महत्या का रूप दिया जा सके। उन्होंने सुसाइट नोट को भी बनावटी और नकली करार दिया। धर्मदास ने दावा किया कि महंत नरेंद्र गिरि लिखना नहीं जानते थे।