मौनी अमावस्या स्नान के लिए भीड़ चार से पांच दिनों में पहुंची लेकिन स्नान के बाद सभी को एक साथ छोड़ दिया गया। हालत यह हुई कि इलाहाबाद, प्रयाग, रामबाग, दारागंज, प्रयागघाट, नैनी और झूंसी स्टेशनों पर इस कदर भीड़ पहुंच गई कि रेलवे की पूरी व्यवस्था चौपट हो गई। दो दिनों में इलाहाबाद से सोमवार की रात नौ बजे तक 101 ट्रेनें चलाई गईं लेकिन भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। अलबत्ता, घटना होने के बाद स्टेशनों पर यात्रियों की इंट्री बंद कर दी जा रही है। आलम यह है कि अगले 48 घंटों में लगातार स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जाए तो भीड़ को निकाला जा सकेगा।
मौनी अमावस्या के लिए उत्तर मध्य रेलवे, उत्तर रेलवे और पूर्वोत्तर रेलवे ने 220 ट्रेनें चलाने की तैयारी की थी। यह ट्रेनें चार दिनों में चलनी थीं। रेलमंत्री का दावा किया कि ठसाठस भरने पर एक ट्रेन में 2500 यात्री आ सकते हैं। यानी, रेलवे ने करीब 5.50 लाख यात्रियों को लेकर जाने के इंतजाम किए, जबकि, मौनी अमावस्या स्नान पर्व के दिन ही इससे ज्यादा भीड़ स्टेशनों पर पहुंच गई। दो दिनों में इलाहाबाद से 67, प्रयाग, प्रयागघाट से 23 और रामबाग से 10 स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं। इससे करीब ढाई से पौने तीन लाख यात्री ही निकाले जा सके।
अनुमान है कि नियमित ट्रेनों से डेढ़ लाख यात्रियों को शहर के बाहर भेजा गया। इसके बाद भी सोमवार की शाम तक शहर के किसी भी स्टेशन पर पैर रखने की जगह नहीं है। रामबाग स्टेशन पर रात 10 बजे 20-22 हजार, प्रयाग में 25 हजार, प्रयागघाट में करीब 15 हजार यात्रियों की भीड़ होने का अनुमान है।
सुपरफास्ट ट्रेनें बना दी गईं पैसेंजर
यात्रियों की भीड़ को निकालने के लिए रेलवे ने स्पेशल ट्रेनों के संचालन के साथ ही नियमित ट्रेनों में डिब्बे बढ़ाए। फिर भी भीड़ को काबू होता न देखकर लंबी दूरी की कई ट्रेनों को पैसेंजर ट्रेन के रूप में तब्दील कर दिया गया। रामबाग स्टेशन होकर वाराणसी जाने वाली शिवगंगा, चौरीचौरा, सिकंदराबाद-पटना एक्सप्रेस समेत अन्य सुपरफास्ट ट्रेनों को भी वाराणसी तक सभी स्टेशनों पर रोका गया।