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MahaKumbh: 'देव सत्ता के अस्तित्व के सामने झुकना ही पड़ेगा...', खास बातचीत में बोले स्वामी यतींद्रानंद गिरि

Fri, 21 Feb 2025 12:07 PM IST
शाहरुख खान आलोक कुमार त्रिपाठी, प्रयागराज

सार

जूना अखाड़े के वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरि ने कहा कि कुंभ भारत की सनातन परंपरा है। कुंभ का प्रारंभ सृष्टि के आदि से है। समुद्र मंथन से कुंभ का श्रीगणेश है और यह साक्षात जीता जागता प्रमाण है कि भारतीय सनातन हिंदू संस्कृति परंपरा कितनी पुरातन कितनी समृद्ध और कितनी उन्नत विकासशील थी। 
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Swami Yatindranand Giri - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इस बार का महाकुंभ हर मायने में अद्वितीय है। वास्तव में आस्था का महासमुद्र उमड़ पड़ा। इतनी बड़ी व्यवस्था को संभाल पाना किसी सरकार अथवा मनुष्य की शक्ति के बाहर है। 
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इसके लिए हमें देव सत्ता के अस्तित्व को स्वीकार करते हुए श्रद्धा से सिर झुकाना ही पड़ेगा। यह कहना है जूना अखाड़े के वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरि का। बातचीत के प्रमुख अंश...

महाकुंभ के आकर्षण का क्या कारण है? 
2019 के कुंभ को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भव्य और दिव्य कुंभ बना दिया। तब से पूरे विश्व में कुंभ का आकर्षण चर्चा का विषय बन गया। कुंभ भारत की सनातन परंपरा है। कुंभ का प्रारंभ सृष्टि के आदि से है। समुद्र मंथन से कुंभ का श्रीगणेश है और यह साक्षात जीता जागता प्रमाण है कि भारतीय सनातन हिंदू संस्कृति परंपरा कितनी पुरातन कितनी समृद्ध और कितनी उन्नत विकासशील थी। वसंत के बाद कुंभ लगभग पूर्ण जैसा हो जाता था किंतु इस बार ऐसा नहीं हुआ अनवरत श्रद्धालु भक्तजन प्रयाग संगम की ओर उमड़ रहे हैं आखिर कुछ तो है इस बार के इस महाकुंभ में।
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महाकुंभ की सफलता पर आपका क्या कहना है? 
लगभग 56 करोड़ श्रद्धालु भक्तजन स्नान कर चुके हैं। यह संसार की महानतम सफलता मानी जाएगी अपने इस वैश्विक रिकॉर्ड को आने वाले समय में कुंभ ही तोड़ सकेगा अन्य कल्पना करना भी संभव नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2025 के इस महाकुंभ को अब तक का कुछ विशेष कुंभ बनाने का संकल्प और चुनौती स्वीकार करते हुए पूरे विश्व को खुला आमंत्रण दिया। उसकी तैयारी प्रचार प्रसार किया जिसका परिणाम भी धीरे-धीरे कल्पना से भी अधिक होने लगा।

अव्यवस्थाओं पर आपका क्या कहना है? 
प्रारंभ में कुंभ की व्यवस्था को लेकर सरकार और मेला प्रशासन दोनों अति उत्साह आत्मविश्वास ओवर कॉन्फिडेंस में थे। लगता था की जो प्रशासन व्यवस्था नियुक्त की है वह कुंभ संपादित कर लेगी किंतु मकर संक्रांति के स्नान में थोड़ी अव्यवस्था हुई जो संकेत थी कि बहुत कुछ अभी करना बाकी है क्योंकि कुंभ केवल मनुष्यों का नहीं होता कुंभ में देव सत्ता भी उपस्थिति रहती है। यक्ष, गंधर्व, नाग तथा इस ब्रह्मांड के महानतम योगीजन महातपस्वी इन सभी की उपस्थिति ही कुंभ है। 

 
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प्रशासन के ऊपर भेदभाव के आरोप भी लगे
साधारण व्यवस्था में रह रहे तपस्वी संत को क्या आदर, सत्कार, व्यवस्था दे पा रहे हैं? क्योंकि इन सभी की प्रसन्नता और आशीर्वाद से ही कुंभ की व्यवस्था संपन्न और सफल होती है। प्रशासन को लगता रहा कि कुछ विशेष राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव संपन्न साधु संत ही विशेष होते हैं।


 
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