महिला नागा साधु (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : AI
पहले तो यह जानना चाहा कि क्या महिला नागा साधु बनने की भी कोई उम्र होती है। इस पर उनका कहना था वैसे तो अध्यात्मक का अनुभव और भगवान को समझने की कोई उम्र नहीं होती है। प्रहलाद ने भी भक्ति दिखाई क्या उस बच्चे की कोई उम्र थी जो अपने पिता की बात न मानकर भक्ति में लीन हो गया और होलिका भी उसका दहन नहीं कर सकी। इसलिए यह कहना कि भक्ति को समझने के लिए कोई उम्र है सही नहीं है। हां, इस बात का ध्यान रखा जाता है कि उनका यह निर्णय बहुत सोच समझ के लिया गया हो। इसलिए वयस्क होने के बाद ही महिला को नागा बनने की प्रक्रिया से गुजारा जाता है।
महिला नागा साधु (सांकेतिक तस्वीर)
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जरूरी नहीं जितनी महिलाएं नागा बनने की इच्छा रखती हैं उन सभी का चुनाव कर लिया जाए। इसके लिए पहले कई वर्षों तक ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है और जब उनके गुरु को इस बात का अहसास हो जाता है कि यह नागा बनने की योग्यता रखती है तो उन्हें यह उपाधि दी जाती है। यह सामाजिक जीवन से पूरी तरह से कट चुकी होती है और महाकुंभ जैसे अवसरों पर ही आपको ये देखने को मिलती है। आपको यह भी बता दें कि महिला नागा साधु वस्त्र धारण करती हैं।
महिला नागा साधु (सांकेतिक तस्वीर)
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इस संबंध में उनसे अगला सवाल किया गया कि नागा साधु तो महाकुंभ के बाद वैभव और वैराग्य में से किसी एक रास्ते का चयन कर लेते हैं तो महिला साधु के लिए कोई अलग रास्ता होता है। उनका कहना था नहीं महिला साधु को भी इन्हीं दो रास्तों में से एक का चयन करना होता है। ऐसी स्थिति में या तो वो किसी मंदिर या पीठ से जुड़ जाती हैं या फिर उन्हें भी वैराग्य का रास्ता ही चुनना होता है।