इसी तरह निर्मल अखाड़े के संतों ने भी भूमि घटाए जाने पर गुस्से का इजहार किया है। कहा जा रहा है कि इस बार अखाड़ों को संत निवास और श्रद्धालु हित की सुविधाओं के लिए कोई बजट तक जारी नहीं किया गया। जबकि,पिछले कुंभ 2019 में अखाड़ों को संत निवास निर्माण के लिए एक-एक करोड़ रुपये दिए गए थे। इसे लेकर भी संतों में नाराजगी है। नक्शे में भूमि कम होने की वजह से अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने मेला प्रशासन पर संतों की उपेक्षा और मनमानी का आरोप लगाया है।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने कहा इस कुंभ में संतों-महामंडलेश्वरों को फूटी कौड़ी तक नहीं मिली है। सभी अखाड़ों में संतों और संस्थाओं की संख्या बढ़ गई है। ऐसे में 25 प्रतिशत भूमि-सुविधाओं में वृद्धि के लिए मेला प्रशासन से कहा गया था, लेकिन वृद्धि तो दूर नक्शे में अखाड़ों की भूमि घटा दी गई है। यह रवैया गैर जिम्मेदाराना और संतों को आहत करने वाला है। इसमें सुधार नहीं किया गया तो अखाड़े मेले में नहीं जाएंगे।
मेला प्रशासन ने बसावट का जो नक्शा दिया है, उससे अखाड़े सहमत नहीं हैं। जब तक सभी अखाड़ों की सहमति नहीं होगी, तबतक भूमि आवंटन में हिस्सा नहीं लिया जाएगा। मेला प्रशासन दो मुंही बातें कर रहा है। परंपरागत तरीके से अखाड़ों को जितनी भूमि आवंटित होती रही है, इस बार उतनी भी भूमि नहीं मिल रही है। अगर इस पर विचार नहीं किया गया तो प्रशासन अपनी मर्जी से मेला कराए, अखाड़ों से उसका कोई लेना देनी नहीं रहेगा। - महंत दुर्गा दास, प्रवक्ता- अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद