इतना ही नहीं इस बार 2750 AI आधारित सीसीटीवी कैमरों का प्रयोग किया गया है। इन कैमरों के माध्यम से पुलिस को इस बात की भी जानकारी लग जाती है कि किस ओर भीड़ ज्यादा है और यह पुलिस कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देते हैं। जिससे भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिल सके। लेकिन इन सब के बीच में एक आम श्रद्धालुओं को काफी परेशान हो रही है। कई बार गूगल मैप भी सही राहों की जानकारी नहीं दे पा रहा है। इस वजह से कई किलोमीटर पैदल चलने वालों को एक अजीब स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। गूगन ने पहली बार किसी अस्थायी नगर के लिए नेविगेशन सुविधा देने का निर्णय लिया है, लेकिन इसे और बेहतर बनाने की आवश्कता है। यह सुविधा 4000 हेक्टेयर में फैले महाकुंभ मेले में उपलब्ध कराई जा रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अभी तक करीब 9 करोड़ लोग महाकुंभ में स्नान का लाभ उठा चुके हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि मौनी अमावस्या पर 8 से 10 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। ऐसे में रास्तों की सही जानकारी लोगों को काफी परेशानियों से बचा सकती है। अभी जो व्यवस्था लागू है उसके अनुसार संगम मेला क्षेत्र के लिए जवाहरलाल नेहरू मार्ग (जिसे काली सड़क के नाम से जाना जाता है) का प्रयोग किया जा रहा है। वहीं निकास के लिए त्रिवेणी मार्ग का प्रयोग किया जा रहा है।