माघ मेले में विभाग दो महीने तक बिजली की निर्बाध आपूर्ति करता है। मेला क्षेत्र में प्रतिवर्ष 90 लाख यूनिट बिजली की खपत होती है। वहीं, कुंभ मेले में यह आंकड़ा और भी ऊपर चला जाता है। माघ मेले में सोलर ऊर्जा का प्रयास अगर सफल हुआ तो इसका उपयोग बड़े स्तर पर कुंभ मेले में भी किया जाएगा।
बिजली विभाग माघ मेले में पहली बार सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करेगा। अगर मुहिम सफल रही तो महाकुंभ 2025 में भी इसे बड़े पैमाने पर लागू किया जाएगा। इससे सौर ऊर्जा को बढ़ावा मिलने के साथ ही मेला क्षेत्र में बिजली की मांग में भी कमी आएगी।
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मुख्य अभियंता विनोद गंगवार के अनुसार माघ मेले में पहली बार सोलर ऊर्जा का इस्तेमाल होगा। लीथियम बैटरी आधारित सोलर ऊर्जा का इस्तेमाल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में होगा। इसकी शुरुआत पहले सरकारी कार्यालयों से होगी।
बता दें कि माघ मेले में विभाग दो महीने तक बिजली की निर्बाध आपूर्ति करता है। मेला क्षेत्र में प्रतिवर्ष 90 लाख यूनिट बिजली की खपत होती है। वहीं, कुंभ मेले में यह आंकड़ा और भी ऊपर चला जाता है। माघ मेले में सोलर ऊर्जा का प्रयास अगर सफल हुआ तो इसका उपयोग बड़े स्तर पर कुंभ मेले में भी किया जाएगा।
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मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। ऐसे में बिजली आपूर्ति दुरुस्त रखना बड़ी चुनौती होती है। माघ मेले के समापन के बाद इन हाइब्रिड लीथियम बैटरी का इस्तेमाल सरकारी अस्पतालों में हो सकता है। विभागीय अधिकारी पूरे प्रोजेक्ट की तैयारी में जुटे हैं। जल्द ही विभाग के शीर्ष के अधिकारी इसपर अपनी मुहर लगाएंगे।