फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट ने कहा : सास की अर्जी पर बहू को घर से बेदखल नहीं कर सकते मजिस्ट्रेट

Tue, 23 Aug 2022 11:30 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति साधना रानी ठाकुर की खंडपीठ ने मेरठ की निवासी भारती गुप्ता की याचिका को मंजूर करते हुए दिया है। याची की ओर से कहा गया कि पिछले 21 साल से मेरठ में अपने ससुर के घर में रहती रही है। मकान ससुर ने बनवाया है।
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेरठ के अपर सिटी मजिस्ट्रेट के सास की अर्जी पर बहू व बच्चों को घर से बेदखल करने के आदेश को सही नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट को यह अधिकार नहीं है। कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के तीन दिसंबर 21 को पारित आदेश को विधि विरुद्ध करार देते हुए रद्द कर दिया है और कहा है कि पक्षकार विचाराधीन सिविल वाद में जारी निषेधाज्ञा आदेश को विखंडित करने की अर्जी दे सकते हैं।

विज्ञापन



यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति साधना रानी ठाकुर की खंडपीठ ने मेरठ की निवासी भारती गुप्ता की याचिका को मंजूर करते हुए दिया है। याची की ओर से कहा गया कि पिछले 21 साल से मेरठ में अपने ससुर के घर में रहती रही है। मकान ससुर ने बनवाया है। उनकी 31 नवंबर 18 को मौत हो गई। उन्होंने कोई वसीयत नहीं की। उनके पीछे उनकी पत्नी दो बेटों बहू के साथ रह रही थी।


याची के पति विपक्षी के बड़े बेटे पंकज की कोविड के कारण 17 जनवरी 21 को मौत हो गई। इसके बाद याची को सास व देवर परेशान करने लगे तो उसने सिविल वाद दायर कर व्यादेश प्राप्त कर लिया। इसके बाद देवर की शह पर याची को बेदखल करने के लिए सास ने सीनियर सिटीजन एक्ट में अर्जी दी। जिस पर एसीएम ने बेदखली आदेश दिया था। ब्यूरो

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें