बुधवार को त्रिजटा स्नान के साथ संतों-कल्पवासियों की माघ मेले से आखिरी विदाई होगी। इससे पहले माघी पूर्णिमा स्नान कर मास पर्यंत अनुष्ठानों की पूर्णाहुति करने वाले कल्पवासियों की वापसी का सिलसिला सोमवार को भी जारी रहा। वापसी की भीड़ की वजह से मेला क्षेत्र की सड़कों से लेकर पांटून पुलों तक जाम की स्थिति रही। पुलों पर कामनाओं की पूर्ति और तरह-तरह के संकल्पों के साथ दिन भर आरपार की मालाएं भी मां गंगा को अर्पित की जाती रहीं। माघी पूर्णिमा के दूसरे दिन शिविरों में संतों-कल्पवासियों की विदाई दिन भर होती रही। इसी के साथ तंबुओं का नगर खाली होने लगा है। महाशिवरात्रि स्नान के साथ माघ मेले का समापन होगा।
संगम पर माघी पूर्णिमा के दूसेर दिन सोमवार को भी स्नान के साथ ही बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं ने अन्न, वस्त्र का दान किया। कहीं रेती पर समूहबद्ध महिलाओं के गीत गूंजते रहे, तो कहीं दीपदान होता रहा। सुबह से ही आरपार की मालाएं भी चढ़ाई जाने लगीं। मां गंगा की पूजा करने के बाद दीपदान और फिर पांटून पुलों पर आरपार की माला चढ़ाई जाती रही। इसके साथ ही शिविरों को खाली किया जाने लगा। कई शिविर समेट लिए गए। हालांकि अभी कुछ संतों के शिविर शिवरात्रि तक रहेंगे। इस वजह से मेला क्षेत्र के सेक्टर एक व दो में चहल-पहल बनी रहेगी।