फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन चुनाव : अध्यक्ष पद पर अशोक सिंह, महासचिव पर नितिन शर्मा आगे

Tue, 07 Feb 2023 12:32 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की नई कार्यकारिणी के लिए चल रही मतगणना सोमवार को भी जारी रही। अध्यक्ष पद अशोक सिंह अपने निकट प्रतिद्वंद्वी अनिल तिवारी से 279 मतों से आगे चल रहे हैं।
विज्ञापन
Prayagraj News : इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की नई कार्यकारिणी के लिए चल रही मतगणना सोमवार को भी जारी रही। अध्यक्ष पद अशोक सिंह अपने निकट प्रतिद्वंद्वी अनिल तिवारी से 279 मतों से आगे चल रहे हैं, जबकि महासचिव पद पर नितिन शर्मा अपने निकट प्रतिद्वंद्वी विक्रांत पांडेय से 322 मतों से आगे चल रहे हैं। सोमवार की शाम तक कुल 6700 मतों की गणना हो चुकी है। चुनाव अधिकारी अनिल भूषण, उप चुनाव अधिकारी वशिष्ठ तिवारी एवं महेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि अध्यक्ष पद पर आगे चल रहे अशोक सिंह को अब तक हुई मतगणना में 2458 मत और महासचिव पद पर आगे चल रहे नितिन शर्मा को 1422 मत मिल चुके हैं।

विज्ञापन


उधर, कंदर्प नारायण हाल में वरिष्ठ उपाध्यक्ष, संयुक्त सचिव प्रशासन और संयुक्त सचिव महिला पद पर चल रही मतगणना में 2500 मतों की गणना पूरी हो चुकी है। इसके अनुसार वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर अमित कुमार, संयुक्त सचिव प्रशासन पद पर सर्वेश कुमार दूबे, संयुक्त सचिव महिला पद पर बिंदु कुमारी आगे चल रही हैं। मतगणना में शक्ति निगम, मंगला प्रसाद राय, एसपी शुक्ला, अशोक कुमार शुक्ला, अनिल कुमार श्रीवास्तव, उमेश कुमार सिंह, आशुतोष तिवारी, पंकज श्रीवासतव, यतीन्द्र, पसी श्रीवास्तव, राजेश खरे, दिव्यांशु तिवारी, विक्रम बहादुर सिंह आदि मौजूद रहे।

विज्ञापन

संशोधित बाईलॉज के विरोध में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष ने दिया इस्तीफा
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह यादव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अध्यक्ष राधाकांत ओझा को भेजे त्यागपत्र में उन्होंने हाईकोर्ट बार के बाईलॉज संशोधन के प्रति नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा है कि मौजूदा समय हाईकोर्ट बार में 31 हजार से अधिक अधिवक्ता पंजीकृत हैं। लेकिन बाईलॉज संशोधन के बाद 3,708 अधिवक्ताओं को ही मताधिकार का अधिकार मिला है। इसमें से सिर्फ 3027 मत ही संशोधन के पक्ष में पड़े हैं।

ऐसे में अन्य अधिवक्ता मतदान के मौलिक अधिकार से वंचित रह गए हैं। यह संशोधन बिना किसी पर्याप्त अवसर और डिस्कसन के ही किया गया है। ऐसे में यह लोकतांत्रिक मर्यादा के प्रतिकूल है। इसके अलावा भी उन्होंने बिंदुवार कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस संशोधन को वापस लेते हुए पूर्व के नियमों को और आसान बनाने की जरूरत है। फिलहाल मौजूदा स्थिति से आहत होकर वह इस्तीफा दे रहे हैं। इसे स्वीकार किया जाए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें