बालाजी मंदिर में लिया अन्न त्यागने का फैसला
वर्ष 2006 में रंजीत बालाजी मंदिर गए और वहां उन्होंने अन्न त्यागने का फैसला लिया। पिछले 18 वर्षों से वह बजरंगबली की सेवा कर रहे हैं। वह बताते हैं कि जब उनका मन होता है तो फल खा लेते हैं, नहीं तो ऐसे भी काम चल जाता है। कल्पवास के दौरान उनकी दिनचर्या में सुबह उठकर स्नान कर पूजा-पाठ करना शामिल है। परिवार में उनकी पत्नी के अलावा दो बच्चे भी हैं। रंजीत मूल रूप से रायबरेली के लालगंज के रहने वाले हैं। रंजीत सिंह के मुताबिक उनपर बजरंगबली की कृपा और मां गंगा का आशीर्वाद है।
गांव में कराया मंदिर का निर्माण
रंजीत सिंह ने अपने गांव में मंदिर का निर्माण कराकर बजरंगबली की मूर्ति स्थापित कराई है। उनका मानना है कि नियमित दिनचर्या फलाहार से भी अधिक जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ और मस्त जीवन का एक अलग सिद्धांत होना चाहिए।