संगम की रेती का आकर्षण और सनातन संस्कृति के प्रति आस्था उन्हें सात समंदर पार से यहां खींच लाई है। पीढ़ियों पहले उनके परबाबा नौकरी के सिलसिले में आस्ट्रेलिया जा बसे थे। तब से कई पीढ़ियां गुजरीं लेकिन भारत आने का संयोग ही नहीं बना। सोमवार को सिडनी, आस्ट्रेलिया से दोनों दंपति इलाहाबाद और संगम की रेती पर पहुंचे तो यहां का आलौकिक दृश्य देखकर अभिभूत हो गए।
अक्षयवट मार्ग स्थित गंगा सेना के शिविर में पहुंचने के बाद दोनों दंपतियों ने सबसे पहले त्रिवेणी स्नान किया, फिर संगम पूजन और फिर गंगा आरती में भी शामिल हुए। इनमें से एक, दीपक सिंह के पूर्वज कभी सुल्तानपुर के किसी गांव में रहते थे, अब उन्हें पता भी नहीं। दीपक सिडनी में इंजीनियर और उनकी पत्नी साधना सिंह सीनियर सीए हैं। इसी तरह सिडनी में ही रहने वाले सीनियर टेक्नीशियन विजेंद्र लाल के पूर्वज काशी के किसी गांव में रहते थे। विजेंद्र की पत्नी रोशनी लाल वहां नर्सिंग से जुड़ी हैं।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में दोनों दंपतियों ने कहा, तकरीबन तीन वर्ष पहले सिडनी में ही स्वामी आनंद गिरि जी से मुलाकात हुई थी। इस दौारन भारतीय संस्कृति के बारे में बहुत कु छ जानने-समझने का मौका मिला। तभी से भारत आने की इच्छा थी, जो अबकी माघ मेले के दौरान पूरी हो सकी है। फिलहाल यहां तीन दिनों के कल्पवास सहित कई तरह के जप, याज्ञिक अनुष्ठान में शामिल होंगे। मेले के रंग भी देखेंगे।
बड़े हनुमान मंदिर के व्यवस्थापक और योगगुरु स्वामी आनंद गिरि ने कहा, बड़ी संख्या में विदेशों में ऐसे भारतीय हैं, जो मूलत: वहीं जन्मे, पढ़े-लिखे और अब नौकरी या व्यवसाय से जुड़े हैं। इन दोनों दंपतियों का भी पहली बार भारत आना हुआ है। यह हम सबके लिए सुखद है कि कम से कम विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोग अपनी जड़ों, अपनी संस्कृति की ओर लौट रहे हैं।