माघ मेले में इन दिनों धरना-प्रदर्शन का दौर चल पड़ा है। कहीं राशन तो कहीं गंगा प्रदूषण और नदी में जल कम होने के मुद्दे पर आंदोलन जारी है। मेला प्रशासन के अफसरों का पूरा दिन प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन लेते हुए बीत जाता है। हालांकि, धरना-प्रदर्शन की आड़ में भी अब खेल शुरू हो गया है। तमाम लोग ऐेसे भी हैं जिन्हें राशन, रसोई गैस, मिट्टी का तेल मिल चुका है, बिजली और पानी का कनेक्शन भी है, फिर भी वे संतुष्ट नहीं हैं। मुद्दा भले ही कोई न हो, लेकिन किसी न किसी धरना-प्रदर्शन में जरूर दिख जाएंगे। दरअसल, इन्हें अतिरिक्त सुविधाएं चाहिए, जो धरना-प्रदर्शन के जरिये प्रशासन पर दबाव बनाकर ही हासिल की जा सकती हैं।
प्रशासन के एक अफसर ने बताया कि कुछ ऐसे साधु-संत भी हैं, जिनके पास धरना-प्रदर्शन के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं है। उनमें से किसी को अपनी जमीन बढ़वानी है, तो कोई सुविधा में इजाफा चाहता है। मेला प्रशासन के पास ऐसे आवेदनों का ढेर लगा है, जिनमें किसी ने चार-पांच स्विस कॉटेज मांगे हैं तो किसी ने किचन की लंबाई-चौड़ाई बढ़ाने की मांग की है। संस्था के शिविर में भले ही पांच लोग रहते हैं, लेकिन उन्हें कम से कम 15 कंबल चाहिए। मेला के नियम ऐसे हैं कि अतिरिक्त जमीन और सुविधा आसानी से नहीं मिलती। नियमों के मुताबिक मेले में जमीन और सुविधाएं उतनी ही मिलेंगी, जितनी पिछली बार मिली थीं। ऐसे में प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए कुछ संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अन्य मुद्दों पर धरना-प्रदर्शन का रास्ता अख्तियार कर लिया है। धरना-प्रदर्शन की इस आड़ में चल रहे ‘खेल’ की वजह से उन कल्पवासियों और श्रद्धालुओं की भी कोई सुनवाई नहीं हो रही, जो हकीकत में दिक्कत का सामना कर रहे हैं। इस बारे में एडीएम सिटी एसके शर्मा का कहना है कि हर श्रद्धालुओं की समस्या सुनी जा रही है और उनकी उचित मांगों को पूरा भी किया जा रहा है। जहां तक अतिरिक्त जमीन या सुविधा दिए जाने की बात है तो बजट और नियमों के अनुरूप ही काम होगा। किसी के दबाव में कोई काम नहीं होगा।
मेले में कुछ समस्याएं ऐसी हैं, जिनकी वजह से श्रद्धालुओं को काफी दिक्कत झेलनी पड़ रही है। भीषण ठंड में अलाव रसूखवाली कुछ संस्थाओं के सामने ही जलवाया जा रहा है और बाकी श्रद्धालु ठंड से ठिठुर रहे हैं। मेला के सेक्टर चार में अलाव की कोई व्यवस्था न होने से नाराज कल्पवासियों का गुस्सा भड़क उठा और शनिवार को उन्होंने अलाव के लिए धरना-प्रदर्शन किया। हालांकि, इसके बावजूद उन्हें कोई राहत नहीं मिली।