केंद्र की सत्ता में मोदी सरकार होने का असर अबकी संगम की रेती पर भी दिखेगा। पहले की तरह राम मंदिर निर्माण को लेकर विश्व हिन्दू परिषद इस बार आक्रामक रवैया नहीं दिखाएगा। केंद्रीय मार्ग दर्शक मंडल की बैठक और संत सम्मेलन के एजेंडे में यह मुद्दा शामिल होगा लेकिन जोर गौ हत्या रोकने, गंगा की निर्मलता व स्वच्छता और धर्मांतरण जैसे मुद्दों पर ही रहेगा। फरवरी में होने वाले हिन्दू सम्मेलन में भी इन्हीं मुद्दों के छाए रहने की संभावना है।
विश्व हिन्दू परिषद का केंद्रीय मार्ग दर्शक मंडल और संत सम्मेलन के जरिए पिछले कई वर्षों से संगम क्षेत्र से माघ मेला से राम मंदिर निर्माण को लेकर आवाज बुलंद करता रहा है। संगम की रेती पर हुए फैसले के अनुसार संगठन सालभर की गतिविधियों को अंजाम देता है। संगठन में चर्चा है कि केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद संगठन पहले जैसी आक्रामकता नहीं दिखा रहा है। आरएसएस की सलाह पर संगठन ने नेताओं को ऐसा कोई काम न करने की सलाह दी है जिसके कारण सरकार की घेराबंदी हो सके। संत सम्मेलन में भी यह असर दिख सकता है।
16 जनवरी को केंद्रीय मार्ग दर्शक मंडल की परेड स्थित विहिप शिविर में बैठक होगी। इसमें संत सम्मेलन के एजेंडे पर चर्चा होगी। 17 जनवरी को शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती के शिविर में सम्मेलन प्रस्तावित है। इसमें स्वस्थ गंगा-निर्मल गंगा, गौ-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध, बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर निकालने, अखंड भारत, धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए कानून का निर्माण के मुद्दे उठेंगे। सूत्र बताते हैं कि विहिप वर्ष 2017 से राम मंदिर निर्माण के लिए संसद में कानून पारित कराने की मांग उठाएगी। हालांकि, इसमें आक्रामक रुख दिखाने के बजाए सहयोग का रवैया संगठन दिखाएगा। कोशिश होगी कि मुद्दा जिंदा रहे लेकिन इससे सरकार की सेहत पर कोई असर न पड़े।