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Prayagraj : माफिया की 200 करोड़ की संपत्ति पर चोट, कमिश्नर रमित शर्मा के कार्यकाल में ढेरों उपलब्धियां

Sun, 23 Jun 2024 11:19 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

आईपीएस रमित ने दो दिसंबर 2022 को प्रयागराज के पहले पुलिस कमिश्नर का पदभार ग्रहण किया। तीन महीने ही बीते थे कि अतीक अहमद गिरोह ने उमेश पाल व उनके दो गनर की हत्या कर सूबे में भूचाल ला दिया। घटना ने कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को सवालों के घेरे में ला दिया।
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आईपीएस रमित शर्मा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जनपद के पहले पुलिस कमिश्नर रमित शर्मा के 19 महीने के कार्यकाल की ढेरों उपलब्धियां रहीं। माफियाराज पर जिस तरह का तगड़ा प्रहार उनके निर्देशन में प्रयागराज पुलिस ने किया, वैसे पहले कभी नहीं हुआ। करीब 200 करोड़ की संपत्ति पर चोट भी पहुंचाई गई, हालांकि उमेश हत्याकांड के लखटकिया इनामियों समेत शाइस्ता एंड कंपनी के पुलिस के गिरफ्त से दूर रहने की मायूसी भी उनके हिस्से आई।

आईपीएस रमित ने दो दिसंबर 2022 को प्रयागराज के पहले पुलिस कमिश्नर का पदभार ग्रहण किया। तीन महीने ही बीते थे कि अतीक अहमद गिरोह ने उमेश पाल व उनके दो गनर की हत्या कर सूबे में भूचाल ला दिया। घटना ने कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को सवालों के घेरे में ला दिया। नए कमिश्नर के सामने यह बड़ी चुनौती थी, लेकिन उनके निर्देशन में प्रयागराज की कमिश्नरेट पुलिस जिस तरह से माफियाराज पर प्रहार किया, वह मिसाल बन गया।

चार दशकों तक आतंक का साम्राज्य चलाने वाले माफिया ब्रदर्स सलाखों के पीछे पहुंचे तो उमेश पाल व दो पुलिसकर्मियों को बम-गोलियाें से छलनी करने वाले भी अपने अंजाम तक पहुंचे। फिर एक-एक कर माफिया व उनके मददगारों पर ऐसा शिकंजा कसा गया कि आतंक के साम्राज्य की कमर टूट गई।

पुलिस हिरासत में अतीक-अशरफ की हत्या को लेकर सवाल खड़े हुए लेकिन तीनों शूटरों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भी पहुंचाया गया। दशकों तक खौफ के माहौल में रहे प्रयागराज को माफियाराज के आतंक से मुक्त कराना कमिश्नरेट पुलिस की सबसे बड़ी उपलब्धि रही।

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पहली बार बेनामी संपत्तियों पर चला चाबुक

आईपीएस रमित शर्मा के कार्यकाल की ही उपलब्धि यह भी रही कि प्रयागराज में पहली बार माफिया व उसके गैंग की बेनामी संपत्तियों पर भी चाबुक चला। डरा-धमकाकर मजदूरों, सफाईकर्मियों के नाम पर करोड़ों की संपत्ति बनाने के खेल का पर्दाफाश हुआ और इन संपत्तियों को कुर्क भी किया गया। यह भी पहली बार ही हुआ कि करीब 15 साल से लंबित कुर्क पड़ी 50 करोड़ की संपत्तियों संबंधित मामले गैंगस्टर कोर्ट में भी भेजे गए। गैंग के सदस्यों की ओर से गोपनीय ढंग से जमीनें बेचे जाने की सूचना पर प्रशासन के सहयोग से लगभग 100 करोड़ मूल्य की संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर रोक भी लगाई गई।

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यह भी हुआ
 
- कमिश्नरेट गठन के बाद गुंडा एक्ट के कई सालों से लंबित लगभग एक हजार मामलों का निस्तारण भी उनके ही कार्यकाल में हुआ।
- प्रभावी पैरवी का ही नतीजा था कि पहली बार अतीक अहमद व उसके दो सहयोगियों को किसी मामले में सजा हुई।
- माघ मेला 2023, वायुसेना के स्थापना दिवस पर एयर-शो का सफल आयोजन
 
शाइस्ता एंड कंपनी का तिलिस्म तोड़ने में मिली मायूसी
 
ढेरों उपलब्धियों के साथ कुछ ऐसे मामले भी रहे जिन्हें लेकर मायूसी ही हाथ आई। उमेश हत्याकांड में फरार शाइस्ता एंड कंपनी एक ऐसा ही मुद्दा रहा जो तिलिस्म बनकर रह गया। उमेश हत्याकांड के पांच लाख के तीन इनामियों के न पकड़े जाने की टीस भी उनके हिस्से आई। कुछ ऐसे भी मौके आए जब यातायात व्यवस्था को लेकर पुलिस पर सवाल खड़े हुए।
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