अतीक अहमद को घोड़ों का बहुत शौक था। यह शौक उसे अपने पिता फिरोज अहमद से विरासत में मिला था। उनके पास ‘सिंधी चाल’ नस्ल का शानदार काला घोड़ा था। काले घोड़े ने राजा भैया के घोड़े के साथ रेस लगाई थी और उसे हराया था। रेस के घोड़ों के शौकीन अतीक ने दो बेहद शानदार घोड़ियां भी पाली थीं। मोहर्रम के समय जुलूस की अगवानी करने वह घोड़ी पर ही बैठकर जाते थे। अस्तबल में एक सवार (ट्रेनर) के साथ दो सेवक हमेशा रहते थे। हालांकि अब ये किस हाल में हैं, यह कोई नहीं बताता। अतीक के दिन बदलने के साथ घोड़ों की चर्चा भी बंद हो गई।
अतीक के पिता फिरोज अहमद घोड़ों के बहुत शौकीन थे। उनकी बग्घी काफी मशहूर थी। पिता का शौक अतीक को विरासत में मिला। उसने अपने अस्तबल में दो शानदार घोड़ियां पाली थीं। घोड़ियों की सवारी अतीक साल में सिर्फ एक बार करता था। मोहर्रम के समय अतीक उनका भाई अशरफ घोड़ियों पर बैठकर ही जुलूस की अगवानी करने जाता था। अतीक अहमद ने करीब 25 साल पहले रेस लगाने वाले घोड़ों को पालना शुरू किया। ‘सिंधी चाल’ नस्ल का उनका काला घोड़ा करीब 15 लाख रुपये का था।
बताते हैं कि पहले कुंडा में घोड़ों की रेस होती थी। उसमें अतीक के काले घोड़े ने राजा भैया के घोड़े को हराया था। इतना ही नहीं काले घोड़े ने बिहार के भोजपुर में कई बार रेस जीती थी। प्रतापगढ़ के दीवानगंज में 26 जनवरी को घोड़ों की रेस होती है, अतीक उसमें अपना घोड़ा जरूर भेजता था। अतीक के पास काले घोड़े के अलावा दो लाल घोड़े भी थे। इन घोड़ों को भी रेस के लिए तमाम जिलों में भेजा जाता था। अतीक अहमद ने अपने अस्तबल के लिए एक सवार यानी ट्रेनर को स्थायी रूप से रखा था। उसके अलावा घोड़ों की मालिश और खान-पान के लिए दो सेवक रखे गए थे।
बेहद खूंखार छह कुत्ते, अतीक ने एक को मार दी थी गोली
प्रयागराज। अतीक अहमद के पास विदेशी ग्रेट डेन नस्ल के छह खूंखार कुत्ते हैं। लाखों रुपये कीमत के यह कुत्ते सिर्फ घर के नौकर राकेश और अतीक के बच्चों को ही पहचानते हैं। राकेश ही उनके बाड़े में भोजन-पानी पहुंचाता था। मंगलवार को जब पीडीए की कार्रवाई शुरू हुई तो दस्ते ने कुत्तों के बाड़े को भी ढहाना चाहा। आसपास के लोगों ने बताया कि कुत्ते बेहद खतरनाक हैं। एक बार एक कुत्ते ने बच्चे पर हमला कर दिया था, तब अतीक अहमद को हमलावर कुत्ते को गोली मारनी पड़ी थी। यह कहानी सुनने के बाद पीडीए के अधिकारियों ने कुत्ते के बाड़े को छोड़ दिया। बुधवार को पड़ोस के लोगों ने कुत्तों को भोजन पहुंचाया।