मेरठ में वर्ष 2011 में सरकार की ओर से मदरसा प्रबंधकों के खाते में चार करोड़ रुपये छात्रवृत्ति के मद में भेजे गए थे। इसके वितरण में बरती गई अनियमितताओं के आरोप में तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सुमन गौतम और याची संजय त्यागी समेत कई मदरसा संचालकों के खिलाफ करीब 98 मुकदमे दर्ज किए गए थे।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तेरह वर्ष पहले मेरठ के मदरसे में हुए छात्रवृत्ति घोटाले के आरोपी जिला अल्पसंख्यक कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक संजय त्यागी के खिलाफ जारी आपराधिक कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
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न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह की कोर्ट ने याची संजय त्यागी की ओर से ट्रायल कोर्ट ने चल रही आपराधिक कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से चार सप्ताह में जवाब तलब किया है। अगली सुनवाई दो जुलाई को होगी।
मेरठ में वर्ष 2011 में सरकार की ओर से मदरसा प्रबंधकों के खाते में चार करोड़ रुपये छात्रवृत्ति के मद में भेजे गए थे। इसके वितरण में बरती गई अनियमितताओं के आरोप में तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सुमन गौतम और याची संजय त्यागी समेत कई मदरसा संचालकों के खिलाफ करीब 98 मुकदमे दर्ज किए गए थे। मामले की जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन मेरठ ने की थी।
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याची के अधिवक्ता सुनील चौधरी ने दलील दी कि मामले की दो बार हुई विभागीय जांच और विजिलेंस जांच में एजेंसियों ने स्वीकार किया कि शासकीय धन के गबन का आरोप साबित नहीं हो रहा है, फिर भी मामले को जांच एजेंसी ने विचारण के लिए ट्रायल कोर्ट में भेज दिया। आपराधिक कार्रवाई अवैधानिक रूप से शुरू हो गई। मामले में तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सुमन गौतम के मामले में हाईकोर्ट ने आपराधिक कार्रवाई पर स्थगन आदेश पारित किया है।