दरियाबाद स्थित तक्षकतीर्थ बड़ा शिवाला मंदिर पूजन करते भाजपा के एमएलसी एके शर्मा। अमर उजाला
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आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी पर मंगलवार को कोविड प्रोटोकॉल तोड़कर हजारों श्रद्धालुओं ने संगम में पुण्य की डुबकी लगाई। संगम तट पर भक्तों ने स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा की और दीपदान किया। इसी के साथ देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु शयन में चले गए और चातुर्मास व्रत आरंभ हो गया। मान्यता के अनुसार देवशयनी एकादशी से कार्तिक की देवोत्थान एकादशी तक चार महीने भगवान क्षीर सागर में शयन करेंगे। इसके साथ ही मांगलिक कार्यों पर रोक लग गई है। अब चार महीने तक शहनाइयां नहीं बज सकेंगी।
भोर में ही संगम पर भक्तों के पहुंचने का सिलसिला आरंभ हो गया। संगम के अलावा किलाघाट, रामघाट, दशाश्वमेध घाट पर देवशयनी एकादशी पर पुण्य की डुबकी लगने लगी। श्रद्धालु स्नान के बाद अन्न, वस्त्र का दान भी करते रहे। कहीं गंगा पूजन होता रहा तो कहीं आहुतियां दी जाती रहीं। तीर्थपुरोहितों की चौकियों पर संकल्प दिलाए जा रहे थे। देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु की गंगा तटों पर सविधि पूजा की गई। मंदिरों में भी नारायण की झांकियां सजाई गईं। व्रतियों ने पीली वस्तुओं के साथ आम और केले का दान किया।
पुराणों के अनुसार पालनकर्ता भगवान विष्णु चार मास तक क्षीरसागर की शैय्या पर विश्राम करते हैं। इसलिए इस अवधि में कोई मांगलिक कार्य नहीं किए जाएंगे। भगवान के शयनकाल के इन चार महीनों में विवाह संस्कार, गृह प्रवेश समेत अन्य मंगल कार्य नहीं होंगे। इसी के साथ कोरोना संक्रमण के बीच अनलॉक हुए शादी -विवाह संस्कार फिर लॉक हो गए।
इसी दिन से चातुर्मास व्रत भी आरंभ हो गया। अब संन्यासी और तपस्वी चार महीने तक चातुर्मास व्रत करेंगे। ज्योतिषाचार्य पं ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। इसलिए इस मास को चतुर्मास भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन से भगवान शिव संसार का संचालन करते हैं। इस दिन से सभी मांगलिक कार्य करना वर्जित हो जाता है। इसके बाद कार्तिक में देवोत्थान एकादशी से फिर मांगलिक कार्य आरंभ होंगे।