1957 के चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उम्मीदवार मसूरियादीन के लिए पंडित नेहरू अपनी रॉल्स रॉयस कार से सरायअकिल चुनाव प्रचार करने आए थे। उन्होंने किसान मजदूर प्रजा पार्टी के खिलाफ फकीराबाद स्थित बाग में भाषण देकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के चुनाव चिन्ह दो बैलो की जोड़ी पर जनता से वोट मांगा था। उस समय पंडित नेहरू का भाषण सुनने के लिए गांव गांव से पैदल ही लोग पहुंच गए थे।
पंडित नेहरू कस्बे के जमीनदार रामकृपाल सिंह ताल्लुकेदार के घर 10 मिनट रुकने के बाद चावल मंडी स्थित विद्या अलंकार विद्यालय भी गए थे। पंडित नेहरू के भाषण का ही असर था कि जनता ने मसूर्यादीन को भारतीय मजदूर प्रजा पार्टी के खिलाफ भारी मतो से विजयी बनाया था। उस दौरान गांव में बहुत कम लोगों के पास रेडियो हुआ करता था। चुनाव परिणाम की जानकारी रेडियो से मिला करती थी।
एक दर्जन से अधिक गांव का मतदान केंद्र हुआ करता था तिल्हापुर
देश की आजादी के कई वर्षो तक गांव गांव न स्कूल की व्यवस्था नहीं थी। जवाहरगंज के सेवानिवृत बुजुर्ग अध्यापक संगम लाल विश्वकर्मा याद करते हुए बताते हैं कि इलाके में एक मतदान केंद्र तिल्हापुर में हुआ करता था। जहां पदुमनाथपुर सुरसेनी, जवाहरगंज, दरहा, गोविंदपुर, हासिमपुर किनार, जैतपुर पूरेहजारी समेत एक दर्जन से अधिक गांव के लोग मतदान करने पैदल ही पांच किलो मीटर जाया करते थे। इससे मतदान प्रतिशत भी कम हो जाता था। धीरे धीरे कुछ दिनों के बाद मतदान केंद्रो की संख्या बढ़ती गई। 1990 तक ज्यादातर गांव में मतदान केंद्र बन गए थे।