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मेले में श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं ये बटुक, जानें कैसे मिलती है इन्हें दीक्षा

Fri, 18 Jan 2019 07:31 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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प्रयाग में चल रहा कुम्भ मेला इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा में है। मोक्ष पाने की कामना लेकर दुनियाभर के श्रद्धालु इस समय संगम में डुबकी लगाने आ रहे हैं। गंगा दर्शन के बाद लोग यहां स्थित मन्दिरों में पूजा अर्चना करते हैं और शिविरों में जाकर देश-दुनिया से संगम की रेती पर जुटे साधु-संतों का आशिर्वाद लेते हैं।
 
 
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साधु-संतों के बीच जैसे नागा बाबा आकर्षण का केन्द्र बने हुए है ठीक उसी तरह ये बटुक भी भक्तों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। ये बटुक हर प्रमुख स्नान पर अपने अखाड़ो के साथ संगम पर स्नान करते हैं। धर्म की हर छोटी बड़ी जिम्मेदारी सहजता के साथ उठाते हैं। छोटी उम्र मे वैराग्य धारण करने वाले ये बच्चे मां बाप की सहमति से ही ऐसा करते हैं। अगर कोई बच्चा भागकर किसी अखाड़े में आकर शिक्षा दीक्षा लेना चाहे तो ये सम्भव नही हैं। हां, अगर उसके परिवारीजन नहीं हैं तो धर्मगुरु उस बालक के बारे में सोच सकता है।
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kumbh photo 2019
50 दिन चलने वाले इस मेले में तमाम छोटे बच्चे अलग-अलग अखाड़ों में शिक्षा लेकर वैराग्य धारण कर रहे हैं। अखाड़े में प्रवेश के बाद उनके ब्रम्हचर्य की परीक्षा ली जाती है। इसमें 6 महीने से 12 साल तक लग जाते हैं। जब अखाड़े के गुरु ये समझ लेते हैं कि अब बालक दीक्षा देने लायक हो गया है तो उसे अगली प्रक्रिया के लिए ले जाया जाता है।
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इस दौरान ये बटुक उक्त मठ के नियमों का पालन करते हैं और मठ के धर्मगुरु जहां जहां जाते हैं वहां ये नए नवेले साधु भी जाते हैं। शिव, विष्णु, शक्ति, सूर्य और गणेश इन छोटे साधुओं के 5 गुरु होते हैं।  
 
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