तारीख पर तारीख के लिए अदालत नहीं बल्कि मुकदमेबाज खुद जिम्मेदार हैं। वह अपनी सुविधानुसार स्थगन की मांग करते हैं। इसके बाद स्थगन का मजा लेते हैं। ऐसी लोगों के बारे में सार्वजनिक मंच पर न बोला जाता है, न उसकी निंदा की जाती है। इस प्रवृति को हतोत्साहित करना जरूरी है।
इस तल्ख टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की अदालत ने आजमगढ़ बुढ़नापुर के तहसीलदार को तीन दिन में व्यक्तिगत हलफनामे संग तलब किया है। मामला बुढ़नापुर तहसील के बेन्दुई गांव का है। शैलेंद्र प्रजापति ने जनहित याचिका के जरिये सरकारी तालाब की जमीन से अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। आरोप लगाया कि निजी प्रतिवादियों के अवैध कब्जे के खिलाफ तहसीलदार ने बेदखली का आदेश पारित कर दिया है। लेकिन आज तक उसका पालन नहीं कराया जा सका।
इस पर कोर्ट ने तहसीलदार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी। लेकिन सुनवाई के वक्त मुख्य स्थायी अधिवक्ता को लिखे पत्र के माध्यम से तहसीलदार ने रिपोर्ट पेश करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की। इससे खफा कोर्ट ने तहसीलदार की गुजारिश को तल्ख टिप्पणी के साथ खारिज कर दिया। कहा कि पक्षकारों की ओर से अपनी सुविधानुसार सुनवाई को स्थगित कराने की प्रवृत्ति अदालत में बढ़ते मुकदमों के लिए बड़ा खतरा है। इसे बढ़ावा नहीं दिया जा सकता।