इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भाभी को जिंदा जलाने के दोषी तिल्लूका उर्फ मनोज की उम्रकैद की सजा बरकरार रखते हुए उसकी अपील खारिज कर दी। यह फैसला न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भाभी को जिंदा जलाने के दोषी तिल्लूका उर्फ मनोज की उम्रकैद की सजा बरकरार रखते हुए उसकी अपील खारिज कर दी। यह फैसला न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने दिया। कोर्ट कहा कि यदि मृत्युपूर्व बयान स्वैच्छिक, सत्य और विश्वसनीय हो तो केवल उसी के आधार पर भी दोषसिद्धि की जा सकती है। मामला आगरा के शमसाबाद क्षेत्र का है।
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मनोज पर दो जुलाई 2015 को रसोई के इस्तेमाल और पांच हजार रुपये लौटाने के विवाद में सत्यवती पर तेल डालकर आग लगाने का आरोप था। 80 प्रतिशत झुलसी सत्यवती की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि घटना के दिन ही मजिस्ट्रेट ने अस्पताल में पीड़िता का मृत्युपूर्व बयान दर्ज किया था और डॉक्टर ने उसके बयान देने की स्थिति में होने की पुष्टि की थी। एफआईआर में देरी और तेल के प्रकार को लेकर विरोधाभास को अदालत ने महत्वहीन मानते हुए अपील खारिज कर दी।