तेज रफ्तार और यात्रा के लिए सुरक्षित माने जा रहे एलएचबी (लिंक हॉफमैन बुश) कोचों की मांग चारों ओर से हो रही है लेकिन जोनल रेलवे इनका ‘सदुपयोग’ नहीं कर पा रहे हैं। पूर्वोत्तर रेलवे को एलएचबी कोचों की तीन रेक मिल गई लेकिन इन्हें पटरियों पर दौड़ाना अब तक संभव नहीं हो सका है। तीनों रेक रामबाग स्टेशन पर खड़े किए गए हैं। दावा किया जा रहा है कि यह रेक शिवगंगा एक्सप्रेस में इस्तेमाल किए जाएंगे। इलाहाबाद से नई दिल्ली के बीच इन रेक को 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से संचालित किया जाएगा। इससे ट्रेन के यात्रा समय में भी बचत होगी।
करीब तीन महीने पहले एलएचबी कोचों का एक रेक मंडुआडीह स्टेशन पहुंचा तो चर्चा शुरू हुई कि मंडुआडीह से नई दिल्ली के बीच घोषित नई ट्रेन में लगाए जाएंगे, लेकिन यह ट्रेन पुराने कोचों के साथ दौड़ा दी गई। इस बीच दो और रेक वाराणसी डिवीजन को आवंटित हो गए। अफसर बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के कारण वाराणसी से नई दिल्ली के बीच चलने वाली कुछ ट्रेनों में तेज रफ्तार वाले कोचों को लगाने की तैयारी है, जो कम समय में यात्रा पूरी कर सके। पहला रेक मंडुआडीह से रामबाग पहुंच गया। यह रेक किसी ट्रेन में जुड़े, इसके पहले ही दो अन्य रेक भी रामबाग पहुंचा दिए गए हैं। तीन एलएचबी रेकों के पहुंचने यात्रियों और कर्मचारियों के लिए यह कौतूहल बने हुए हैं, लेकिन रेलवे इन्हें चला नहीं रहा है। वाराणसी डिवीजन के पीआरओ अशोक कुमार का कहना है कि एलएचबी कोचों का इस्तेमाल शिवगंगा एक्सप्रेस में किया जाएगा लेकिन अभी जरूरी कोचों की संख्या पूरी नहीं हो सकी है। कोचों की संख्या पूरी होने के बाद इनका परिचालन शुरू होगा।
पुरुषोत्तम एक्सप्रेस, महाबोधि एक्सप्रेस और डीलक्स यानी पूर्वा एक्सप्रेस में एलएचबी कोच सालभर पहले जोड़ दिए गए लेकिन ट्रायल होने के बाद भी अब तक इन ट्रेनों को 130 किमी की रफ्तार से नहीं चलाया जा सका। रेलवे प्रशासन इसके लिए प्रशिक्षित लोको पायलटों की कमी बता रहा है। एनसीआर सीपीआरओ बिजय कुमार के मुताबिक लोको पायलटों की ट्रेनिंग पूरी हो गई है। जल्द ही तीनों ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाई जाएगी।