विधानसभा चुनाव के दौरान जिले की 12 में से आठ सीट जीतने वाली भाजपा के विधायकों के लिए निकाय चुनाव किसी चुनौती से कम नहीं है। शहर के कई वार्डों में पार्टी ने अपने विधायकों की पैरवी के बाद ही प्रत्याशियों के टिकट फाइनल किए हैं। ऐसे में चुनाव तो पार्षद प्रत्याशी लड़ रहे हैं, लेकिन दांव पर विधायकों की साख लगी है। विधायकों की अपने क्षेत्र में कितनी पकड़ है, नतीजों के बाद यह भी साफ हो जाएगा। साथ ही पिछले आठ माह के दौरान योगी सरकार के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड भी नतीजों के बाद सामने आएगा। लिहाजा, मुख्यमंत्री की निकाय चुनाव पर सीधी नजर है। विधायक भी अपने-अपने क्षेत्र में दमखम दिखा रहे हैं।
इलाहाबाद में यमुनापार की चार में से तीन, गंगापार की पांच में से दो और शहर की तीनों विधानसभाओं में भाजपा के ही विधायक हैं। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के साथ योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह, नंद गोपाल गुप्ता नंदी और डॉ. रीता बहुगुणा जोशी भी इलाहाबाद की हैं। शहर के 80 वार्डों में इन चारों कद्दावर नेताओं से जुड़े तमाम प्रत्याशी भाजपा के टिकट पर इस बार चुनाव लड़ रहे हैं। इन चारों में से सिद्धार्थनाथ सिंह शहर पश्चिम से और नंद गोपाल गुप्ता नंदी शहर दक्षिणी विधानसभा सीट से विधायक भी हैं। शहर पश्चिम की बात करें तो यहां कुल 21 वार्ड हैं। इन सभी में सिद्धार्थनाथ सिंह लगातार जनसंपर्क एवं नुक्कड़ सभाओं में शिरकत कर प्रत्याशी के लिए समर्थन जुटा रहे हैं। सोमवार को भी सिद्धार्थनाथ इलाहाबाद पहुंचे और यहां उनके 26 नवंबर तक रहने का कार्यक्रम है। इस दौरान वह सभी 21 वार्डों में जनसंपर्क करेंगे।
वहीं शहर दक्षिणी विधानसभा में सर्वाधिक 30 वार्ड हैं। स्थानीय विधायक होने की वजह से नंद गोपाल गुप्ता नंदी भी कई दिनों से यहां के सभी वार्डों में सक्रिय हैं। इसके अलावा उनकी पत्नी के मेयर प्रत्याशी होने की वजह से नंदी अन्य वार्डों में भी चुनाव प्रचार कर रहे हैं। शहर उत्तरी के 29 वार्डों में विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी भी सक्रिय हैं। हालांकि, तमाम वार्डों में भाजपा के बागी प्रत्याशी ही विधायकों के लिए चुनौती बन गए हैं। वहीं दूसरी ओर विधायक डॉ. रीता बहुगुणा जोशी भी मंगलवार को इलाहाबाद पहुंच रही हैं। वह भी कई वार्डों में चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगी।