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छह माह में फ्रीहोल्ड की जाएं पट्टे की जमीनें

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Lease lands to be freehold in six months
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प्रयागराज। प्रदेश भर में पट्टे की जमीनों को फ्रीहोल्ड करने के लंबित मामलों को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को ऐसे सभी मामलों पर छह माह में निर्णय लेने का आदेश दिया है। नजूल की जमीनों को फ्रीहोल्ड करने की अर्जियां सभी जिलों में दशकों तक लंबित रहती हैं। इसके मद्देनजर कोर्ट ने कहा है कि आदेश की प्रति मुख्य सचिव को दी जाए और वह इसे सभी जिले के जिलाधिकारियों और एडीएम नजूल तक पहुंचाना सुनिश्चित करें। प्रयागराज के डा. अशोक तेहलियानी की याचिका स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता और न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की पीठ ने कहा कि यह ऐसे पहले से लंबित मामलों पर भी लागू होगा।
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कोर्ट ने सरकारी वकील को भी निर्देश दिया है कि आदेश की प्रति मुख्य सचिव को मुहैया कराएं, ताकि आदेश का पालन सुनिश्चित किया जा सके। खंडपीठ का कहना था कि नजूल भूमि को फ्रीहोल्ड करने की सरकार की नीति है। इसका पालन करना प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी है। उनका कर्तव्य है कि पट्टा धारकों की ऐसी अर्जियों को एक समयसीमा में निस्तारित करें, जिसमें फ्रीहोल्ड करने की मांग की गई है। मगर, अधिकारी ऐसा करने में असफल रहे हैं। इस अदालत में भी ऐसी तमाम याचिकाएं लंबित हैं। सभी की एक जैसी कहानी है।
इस स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए पीठ ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों के समय से निर्णय न लेने के कारण अदालतों में मुकदमे बढ़ रहे हैं। याची डा. तेहलियानी के मामले में 20 जनवरी 1973 को जमीन का टाइटिल बदलनेे की अर्जी दी गई थी। इसके बाद याची ने 1999 में फ्रीहोल्ड की अर्जी दी। इस पर छह साल बाद निर्णय लिया गया और प्रदेश सरकार ने 12 साल बाद अदालत में इसका जवाब दाखिल किया। इस विलंब का कोई स्पष्टीकरण भी नहीं दिया गया है। जबकि, प्रशासनिक अधिकारी एक समयसीमा में ऐसे मामलों को तय करने के लिए बाध्य हैं। उनके ऐसा न करने से जनता के अनुच्छेद 14 में प्राप्त अधिकार (मनमानेपन के विरुद्ध अधिकार) का उल्लंघन होता है। इसलिए आवश्यक है कि समयबद्ध तरीके से ऐसे मामलों का निस्तारण किया जाए।
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